महिलाओं ने की बड़ी अमावस्या के दिन वट वृक्ष (बरगद) की पूजा अर्चना
श्रवण सारस्वत
रींगस (नवयत्न)। हिन्दू धर्म में बड़ अमावस्या (जिसे वट सावित्री अमावस्या भी कहा जाता है) इसका अत्यंत धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। यह व्रत मुख्य रूप से सुहागिन महिलाओं द्वारा पति की लंबी आयु, उत्तम स्वास्थ्य और अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए रखा जाता है।

सुनीता शर्मा व शकुंतला देवी ने ने बताया की पौराणिक कथाओं के अनुसार, ज्येष्ठ अमावस्या के दिन ही देवी सावित्री ने यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस पाए थे। उनकी अमर प्रेम कहानी और निष्ठा के प्रतीक के रूप में इस दिन वट वृक्ष की पूजा की जाती है।वट (बरगद) के पेड़ को अत्यंत पवित्र माना जाता है, वही पंडित राकेश शर्मा व पंडित जीतू शर्मा ने बताया कि बरगद में त्रिदेव यानी ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों का वास होता है। इस दिन महिलाएं बरगद के पेड़ के नीचे बैठकर पूजा करती हैं और पेड़ के चारों ओर कच्चा सूत (कलावा) लपेटकर 7 परिक्रमा करती हैं।धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अमावस्या का दिन पितरों की मुक्ति और तर्पण के लिए भी श्रेष्ठ माना जाता है। इस दिन स्नान और दान करने से पुण्य फलों की प्राप्ति होती है। वट वृक्ष अपनी लंबी आयु के लिए जाना जाता है, इसलिए कामना की जाती है कि साधिका का सुहाग भी उसी वृक्ष की तरह अचल रहे।