महिलाओं को मिलेगा राजनीतिक सशक्तिकरण का नया आधार, नारी शक्ति वंदन अधिनियम ऐतिहासिक कदम
निलेश मुद्गल
झुंझुनू (नवयत्न)। नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 को लेकर सर्किट हाउस झुंझुनू में आयोजित प्रेस वार्ता में पूर्व सांसद संतोष अहलावत ने इसे महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल बताया। उन्होंने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि यह अधिनियम महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने और भारतीय लोकतंत्र को अधिक समावेशी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
उन्होंने बताया कि इस अधिनियम के तहत लोकसभा, राज्य विधानसभाओं और दिल्ली विधानसभा में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटों का आरक्षण सुनिश्चित किया गया है। यह पहल केवल राजनीतिक प्रतिनिधित्व तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के समग्र सामाजिक और आर्थिक विकास को भी गति देने का माध्यम बनेगी।
प्रेस वार्ता में कहा गया कि विभिन्न अध्ययनों से यह स्पष्ट हुआ है कि महिलाओं की भागीदारी बढ़ने से आर्थिक वृद्धि तेज होती है और नीतियां अधिक समावेशी एवं प्रभावी बनती हैं। पिछले वर्षों में महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां दर्ज की गई हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत अधिकांश घर महिलाओं के नाम पर पंजीकृत हुए हैं, मुद्रा योजना के माध्यम से बड़ी संख्या में महिलाओं को वित्तीय सहायता मिली है तथा STEM क्षेत्रों में भी उनकी भागीदारी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
इसके अलावा उज्ज्वला योजना, जल जीवन मिशन और स्वच्छ भारत मिशन जैसी सरकारी योजनाओं ने महिलाओं के जीवन स्तर में व्यापक सुधार किया है। साथ ही मातृ मृत्यु दर में कमी और मातृत्व अवकाश में वृद्धि जैसे कदमों ने स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा को भी मजबूत किया है।
राजनीतिक क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। हाल के चुनावों में महिलाओं की मतदान दर में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है और पंचायत स्तर पर उनका प्रतिनिधित्व लगभग 46 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। हालांकि संसद और विधानसभाओं में उनकी भागीदारी अभी भी सीमित है, जिसे यह अधिनियम दूर करने की दिशा में एक ठोस प्रयास है।
विशेषज्ञों का मानना है कि महिला नेतृत्व से नीतियों में सकारात्मक बदलाव आते हैं, जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य और जल प्रबंधन पर अधिक ध्यान, बेहतर जवाबदेही और प्रभावी शासन।
अंत में कहा गया कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 देश में महिला-नेतृत्व वाले विकास मॉडल को प्रोत्साहित करेगा और विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यह अधिनियम महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा तथा भारत के लोकतंत्र को अधिक मजबूत, संतुलित और समावेशी बनाएगा।