भव्य उपनयन संस्कार से गुरुकुल में गूंजे वैदिक मंत्र, नवप्रवेशित विद्यार्थियों ने धारण किया यज्ञोपवीत
ललित दाधीच
राजलदेसर (नवयत्न) | सिमसिया रोड स्थित भगवती भद्रकाली शक्ति पीठ वैदिक सनातन संस्कृति संरक्षण संस्थान के वैदिक गुरुकुलम् में सत्र 2026-27 के नवप्रवेशित विद्यार्थियों का यज्ञोपवीत (उपनयन) संस्कार श्रद्धा, भक्ति एवं वैदिक परंपराओं के अनुरूप भव्य रूप से संपन्न हुआ। प्रातःकाल से ही गुरुकुल परिसर में वैदिक मंत्रोच्चार, हवन एवं पूजन के साथ धार्मिक वातावरण बना रहा। इस पावन अवसर पर पूज्य दंडी स्वामी जोगेन्द्राश्रम महाराज, विरेन्द्राश्रम , अवधूत स्वामी विश्वेन्द्राश्रम एवं काशी से पधारे विमलदेव तीर्थ के सानिध्य में संपूर्ण अनुष्ठान आयोजित किया गया। उनके मार्गदर्शन में वैदिक आचार्य जीवन किशोर जोशी (सामवेदी), उदित जोशी एवं काशी के आचार्य शिवम् ओझा के आचार्यत्व में विधि-विधानपूर्वक उपनयन संस्कार संपन्न हुआ। इस दौरान ज्योतिषाचार्य खिंवराज अपनी धर्मपत्नी सहित यजमान रहे।
संस्कार के दौरान विद्यार्थियों को यज्ञोपवीत धारण कराया गया तथा उन्हें गायत्री मंत्र एवं वैदिक आचार-विचारों का महत्व समझाया गया। इस अवसर पर दंडी स्वामी शिवेन्द्राश्रम महाराज ने उपनयन संस्कार की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह संस्कार ब्रह्मचर्य जीवन का प्रथम सोपान है, जो बालक के आध्यात्मिक एवं शैक्षिक विकास की आधारशिला रखता है। उन्होंने कहा कि उपनयन के माध्यम से विद्यार्थी गुरु के सान्निध्य में रहकर ज्ञानार्जन, इन्द्रिय संयम, सत्य, अहिंसा एवं अनुशासन का पालन करना सीखता है। साथ ही सादा जीवन और उच्च विचार की भावना विकसित होती है, जो उसके उज्ज्वल भविष्य की दिशा निर्धारित करती है। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में अभिभावकों की उपस्थिति रही। उन्होंने अपने बच्चों को इस पावन संस्कार में सहभागी होते देख हर्ष व्यक्त किया और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। आयोजन के दौरान संपूर्ण वातावरण भक्तिमय एवं उत्साहपूर्ण बना रहा। अंत में आश्रम परिवार की ओर से सभी संत-महात्माओं, आचार्यों एवं अभिभावकों के प्रति आभार व्यक्त किया गया। यह आयोजन विद्यार्थियों के जीवन में संस्कार, शिक्षा एवं आध्यात्मिकता के नए अध्याय का शुभारंभ साबित हुआ।