अपना घर आश्रम में हुआ मानवता, प्रेम और परिवार के अद्भुत मिलन का भावुक दृश्य

निसं
नोखा (नवयत्न)। जीवन राम प्रभु जी जो पिछले लगभग 15 वर्षों से मानसिक स्थिति अस्वस्थ होने के कारण कई बार घर से इधर-उधर निकल जाया करते थे, एक दिन घर से निकलने के बाद वापस अपने परिवार तक नहीं पहुँच पाए। इसके पश्चात उन्हें हिसार हाईवे, राजगढ़ क्षेत्र से रेस्क्यू कर सेवा भाव के साथ अपना घर आश्रम नोखा लाया गया। 10 नवम्बर 2025 को आश्रम में लाने के बाद प्रभुजी को समुचित चिकित्सा, भोजन, वस्त्र एवं हर प्रकार की आवश्यक सुविधाएँ उपलब्ध करवाई गईं।

आश्रम परिवार ने उन्हें अपने ही सदस्य की तरह स्नेह एवं सेवा प्रदान की। कुछ समय पश्चात आश्रम द्वारा सोशल मीडिया पर साझा की गई एक इंस्टाग्राम रील प्रभुजी के पुत्र सचिन गुर्जर की नजर में आई। रील देखते ही पुत्र भावुक हो उठा और तुरंत अपना घर आश्रम नोखा से संपर्क कर कहा ये मेरे पिताजी हैं, मैं इन्हें लेने तुरंत आ रहा हूँ। इसके बाद प्रभु जी का पूरा परिवार धर्मपत्नी कमलेश देवी, पुत्र सचिन गुर्जर एवं भतीजा संजय गुर्जर तत्काल कोटपूतली से अपना घर आश्रम नोखा के लिए रवाना हो गए।

जब परिवार ने वर्षों बाद अपने पिता एवं परिवार के मुखिया जीवन राम को सामने देखा तो सभी की आँखें नम हो उठीं। पुत्र ने अपने पिता को गले लगाया और वहाँ उपस्थित हर व्यक्ति की आँखों में प्रेम और संवेदनाओं की झंकार सुनाई देने लगी। यह दृश्य वास्तव में मानवता और सेवा का जीवंत उदाहरण बन गया। इस अवसर पर आश्रम के सचिव सतीश झंवर ने कहा अपना घर आश्रम केवल सेवा नहीं बल्कि बिछड़े हुए परिवारों को मिलाने का भी एक माध्यम बन रहा है।

मानवता की राह पर किया गया प्रत्येक प्रयास किसी के जीवन में नई आशा और खुशियाँ लेकर आता है। आज का यह मिलन इस बात का प्रेरणादायक उदाहरण है कि सच्ची सेवा केवल भोजन और उपचार तक सीमित नहीं होती बल्कि किसी बिछड़े हुए व्यक्ति को उसके परिवार से मिलाना भी सबसे बड़ी मानव सेवा है। अपना घर आश्रम नोखा निरंतर मानवता की सेवा हेतु समर्पित है।

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