राजकीय भरतिया अस्पताल में सफाई व्यवस्था बेपटरी

नवरतन वर्मा
चूरू (नवयत्न) । चूरू के सबसे बड़े राजकीय भरतिया अस्पताल में सफाई व्यवस्था की बदहाली ने अस्पताल प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिले के सबसे बड़े राजकीय भरतिया अस्पताल में सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई नजर आ रही है। अस्पताल प्रशासन की ओर से सफाई व्यवस्था बनाए रखने के लिए करीब 80 सफाईकर्मियों को ठेके पर लगाया गया है और हर माह लगभग 10 लाख रुपए खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद अस्पताल परिसर और वार्डों में गंदगी का आलम बना हुआ है। ऐसे में अस्पताल की व्यवस्थाओं पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं।
लचर सफाई व्यवस्था से मरीजों और उनके परिजनों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। मामला तब सामने आया जब SICU वार्ड में भर्ती एक मरीज के परिजनों ने गंदगी को लेकर अस्पताल स्टाफ से शिकायत की। आरोप है कि संतोषजनक जवाब देने के बजाय कर्मचारियों ने अभद्र व्यवहार किया। इसके बाद परिजनों ने अस्पताल प्रशासन को लिखित शिकायत पत्र सौंपते हुए सफाई व्यवस्था की तस्वीरें भी भेजीं।
शिकायत मिलते ही मेडिकल कॉलेज प्रिंसिपल डॉ. एम.एम. पुकार ने तुरंत अस्पताल का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान अस्पताल परिसर से लेकर विभिन्न वार्डों तक गंदगी नजर आई, जिस पर उन्होंने नाराजगी जाहिर करते हुए जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों को कड़ी फटकार लगाई।
निरीक्षण के दौरान प्रिंसिपल ने सफाई सुपरवाइजर से कर्मचारियों की तैनाती और कार्य व्यवस्था की जानकारी ली तथा तत्काल सुधार के निर्देश दिए। उन्होंने मातृ एवं शिशु इकाई, ट्रॉमा सेंटर और बायोमेडिकल वेस्ट कक्ष का भी जायजा लिया। ट्रॉमा वार्ड की दीवारें पान मसाले की पीक से रंगी मिलीं, जिस पर संबंधित इंचार्ज को फटकार लगाई गई। वहीं बायोमेडिकल वेस्ट कक्ष के बाहर भी कचरा बिखरा मिला।
जांच में यह भी सामने आया कि सफाई ठेका होने के बावजूद सफाई कर्मचारियों के दस्तावेज अस्पताल प्रशासन को उपलब्ध नहीं करवाए गए हैं। साथ ही अब तक किसी भी सफाई कर्मचारी की बायोमेट्रिक उपस्थिति दर्ज नहीं हुई है।
मामले में मेडिकल कॉलेज प्रिंसिपल डॉ. एम.एम. पुकार ने बताया कि उन्हें मरीज की ओर से लिखित शिकायत और फोटो प्राप्त हुए थे, जिसके बाद उन्होंने अस्पताल का निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि निरीक्षण में वास्तव में सफाई व्यवस्था बेहद खराब मिली। इसके बाद सफाई सुपरवाइजर, नर्सिंग ऑफिसर और ठेकेदार को मौके पर बुलाकर गंदगी दिखाई गई और दो दिन में व्यवस्था सुधारने के निर्देश दिए गए।
उन्होंने बताया कि शिकायत में मरीज के परिजनों ने सफाई कर्मचारी द्वारा कथित रूप से अभद्र व्यवहार का भी आरोप लगाया है। परिजनों के अनुसार सफाईकर्मी ने कहा कि “अगर ज्यादा व्यवस्था चाहिए तो प्राइवेट अस्पताल में जाओ।” हालांकि प्रिंसिपल ने कहा कि अभी तक संबंधित कर्मचारी से उनकी बातचीत नहीं हुई है।
डॉ. पुकार ने कहा कि अस्पताल में करीब 80 सफाईकर्मियों का ठेका दिया गया है, जिस पर प्रतिमाह लगभग 7 लाख रुपए खर्च होते हैं। इसके अलावा सफाई सामग्री और बायोमेडिकल वेस्ट प्रबंधन सहित कुल खर्च करीब 10 लाख रुपए तक पहुंचता है। उन्होंने माना कि इतने बड़े खर्च के बावजूद व्यवस्थाओं में कमियां नहीं रहनी चाहिए।
प्रिंसिपल ने साफ कहा कि मामले में अधीक्षक से चर्चा कर जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि “जब हर माह लाखों रुपए खर्च हो रहे हैं तो ऐसी अव्यवस्था किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं की जाएगी।
अब सवाल यही उठ रहा है कि जब अस्पताल प्रशासन हर माह लाखों रुपए खर्च कर रहा है, तो फिर मरीजों को गंदगी के बीच इलाज क्यों करवाना पड़ रहा है। फिलहाल अस्पताल प्रशासन ने जल्द व्यवस्था सुधारने का दावा किया है, लेकिन देखना होगा कि जमीनी स्तर पर हालात कब तक बदलते हैं।
अस्पताल में अव्यवस्था या राजनीति
वहीं शहर में अस्पताल व्यवस्था को लेकर राजनीति होनें की भी चर्चाएं जोरो पर है, लोगो का कहना है कि जनप्रतिनिधियों और जिम्मेदार अधिकारियों में ताल मेल नहीं होने के कारण भी आए दिन आमजन को अस्पताल की समस्याओं से जूझना पड़ता है। सफाई व्यवस्था को लेकर हुई टेंडर प्रक्रिया में भी राजनेता और जिम्मेदार अधिकारियों की खींचतान बनी हुई है।

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