लॉकडाउन से पहले 4.2 दिन में केस डबल हो रहे थे, अब 11 दिन में दोगुने हो रहे; 14 दिन पहले 13% रहा रिकवरी रेट अब 25% पहुंचा

देश में कोरोना को रोकने में काफी हद तक कामयाबी मिली है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने गुरुवार को बताया कि लॉकडाउन से पहले देश में संक्रमितों की संख्या हर 4.2 दिन में दोगुनी हो रही थी। अब यह 11 दिनों में संक्रमण के मामले डबल हो रहे हैं। कई राज्यों के डबलिंग रेट इससे भी अधिक है। मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने बताया कि संक्रमितों के रिकवरी रेट में भी लगातार बढ़ोतरी हो रही है। अभी तक 8324 लोगों को स्वस्थ हो चुके हैं। रिकवरी रेट 25.19% हो गया है। 14 दिन पहले यह 13.06% था।

कोरोना से मृत्यु दर 3.2, सबसे ज्यादा पुरुष मरीजों की मौत 

अग्रवाल ने बताया कि कोरोना से मृत्यु दर अन्य देशों की अपेक्षा यहां काफी कम है। यहां कोरोना से मृत्यु दर 3.2 है। गंभीर मरीजों की संख्या भी कम है। देश में जितने भी कोरोना संक्रमित हैं, उनमें से महज 0.33% ही वेंटीलेटर पर हैं जबकि 1.5% मरीज ऑक्सीजन सपोर्ट हैं। 2.34% मरीज आईसीयू में हैं। मरने वाले कुल मरीजों में सबसे ज्यादा 65% पुरुष थे जबकि 35% महिलाएं थीं। आयु वर्ग के हिसाब से देखें तो 45 साल से नीचे आयु वर्ग के 14% संक्रमितों की मौत हुई है। 45 से 60 साल के 34.8% और 60 साल से अधिक आयु वर्ग के 51.2% मरीजों की मौत हुई है।

इन राज्यों में डबलिंग रेट नेशनल से भी अधिक

अग्रवाल ने बताया कि कई राज्य संक्रमण रोकने में काफी अच्छा काम कर रहे हैं। इसमें 7 ऐसे राज्य हैं, जहां संक्रमितों का डबलिंग रेट 11 से 20 दिन है। इसमें दिल्ली, उत्तर प्रदेश, जम्मू कश्मीर, उड़ीसा, राजस्थान, तमिलनाडु और पंजाब है। इसी तरह 5 ऐसे राज्य हैं, जहां 40 दिनों में संक्रमितों की संख्या दोगुनी हो रही है। इसमें कर्नाटक, लद्दाख, हरियाणा, उत्तराखंड और केरल शामिल है। वहीं, 3 राज्य ऐसे हैं जहां 40 से भी ज्यादा दिनों में केस डबल हो रहे हैं। इसमें असम, तेलंगाना और छत्तीसगढ़ शामिल हैं।

देश में रोजाना 49 हजार टेस्ट किए जा रहे हैं- अग्रवाल

लव अग्रवाल ने कहा- रोजाना 49 हजार हजार टेस्ट किए जा रहे हैं। 288 सरकारी प्रयोगशालाएं 97 निजी लैब की चेन के साथ मिलकर काम कर रही हैं और 16 हजार कलेक्शन सेंटर पर सैंपल इकट्ठा किए जा रहे हैं। अगले कुछ दिनों में हम अपनी टेस्ट क्षमता एक लाख रोजाना करने पर काम कर रहे हैं। कोरोना की दवा आने में अभी वक्त है, ऐसे में सोशल डिस्टेंसिंग और लॉकडाउन प्रभावी सामाजिक दवा के तौर पर काम कर रहे हैं। विज्ञान और तकनीकी मंत्रालय लगातार इस दिशा में काम कर रहा है, जिससे टेस्टिंग प्रक्रिया को तेज बनाया जा सके।

फंसे लोगों को घर पहुंचाने के लिए राज्य सरकारें इंतजाम करेंगी

गृह मंत्रालय की संयुक्त सचिव पुण्यसलिला श्रीवास्तव ने बताया कि देश के विभिन्न हिस्सों में फंसे हुए प्रवासी मजदूर, छात्र और पर्यटक अपने घरों को जा सकते हैं। इसके लिए राज्य सरकारें बसों का इंतजाम करेंगी। सभी राज्यों को इसके लिए 6 पॉइंट्स की गाइडलाइन का पालन करना होगा। इसमें बताया गया है कि कैसे सरकारें इन फंसे हुए लोगों को उनके घर तक पहुंचाने का काम कर सकती हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, सरकार के इस फैसले से देशभर में फंसे करीब 10 लाख से ज्यादा मजदूरों, छात्रों, श्रद्धालुओं, सैलानियों को राहत मिलेगी।

इस गाइडलाइन का करना होगा पालन

  • सभी राज्य और केंद्र शासित राज्य सरकारें मजदूरों, छात्रों और पर्यटकों को घर भेजे जाने के लिए नोडल अथॉरिटी गठित करें। यही अथॉरिटी अन्य राज्य सरकारों के साथ बातचीत करके फंसे हुए लोगों को भेजने और उन्हें वापस बुलाने का काम करेगी। अथॉरिटी की जिम्मेदारी होगी कि वह फंसे हुए लोगों का रजिस्ट्रेशन कराएं।
  • अगर कहीं पर कोई समूह फंसा हुआ है और वह अपने मूल निवास स्थान जाना चाहता है तो राज्य सरकारें आपसी सहमति के साथ उन्हें छूट दे सकतीं हैं।
  • फंसे हुए लोगों की पूरी तरह से मेडिकल जांच होगी। बगैर लक्षण वाले को ही यात्रा करने की अनुमति दी जाएगी।
  • जिस बस में लोगों को ले जाने की व्यवस्था होगी उसे पूरी तरह से सैनिटाइज कराया जाएगा और अंदर भी लोगों को बैठाने में सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का पालन कराया जाएगा।
  • राज्य सरकारें फंसे हुए लोगों को उनके घरों तक पहुंचाने के लिए खुद रूट तय करेंगी।
  • घर पहुंचते ही लोगों की जांच होगी। इसके बाद सभी को 14 दिनों का होम क्वारैंटाइन में रहना होगा। इस बीच लोगों को अपने मोबाइल फोन में आरोग्य सेतु ऐप हमेशा ऑन रखना होगा ताकि उन्हें ट्रेस किया जा सके।
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