थार की धरती पर पनप रही नई वैज्ञानिक चेतना
गजेंद्र सिंह
सरदारशहर (नवयत्न)। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना अटल टिंकरिंग लैब अब देशभर में बच्चों के भीतर वैज्ञानिक सोच और नवाचार की नई चेतना पैदा कर रही है। नीति आयोग की अटल नवाचार मिशन योजना के तहत शुरू की गई इस पहल का उद्देश्य स्कूली बच्चों को कम उम्र से ही विज्ञान, तकनीक, रोबोटिक्स, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और नवाचार से जोड़ना है, ताकि बच्चे केवल किताबों तक सीमित न रहकर प्रयोगों और मॉडल के माध्यम से सीख सकें।
देशभर में वर्तमान में 10 हजार से अधिक अटल टिंकरिंग लैब संचालित हो रही हैं, जहां लाखों विद्यार्थी आधुनिक तकनीक से जुड़कर भविष्य की नई संभावनाओं को समझ रहे हैं। इन लैब्स में बच्चों को रोबोटिक्स, ड्रोन तकनीक, कोडिंग, सेंसर तकनीक, थ्री-डी प्रिंटिंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे विषयों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाता है।
थार का द्वार कहे जाने वाले सरदारशहर में स्थित कैम्ब्रिज कान्वेंट स्कूल की अटल टिंकरिंग लैब भी इसी बदलाव की मजबूत तस्वीर पेश कर रही है। साल 2020 में शुरू हुई इस लैब ने पारंपरिक पढ़ाई के तरीके को बदल दिया है। यहां बच्चे केवल किताबें पढ़ने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ‘खुद करके सीखो’ की संस्कृति के साथ विज्ञान को व्यवहारिक रूप में समझ रहे हैं।
कक्षा 6 से 10वीं तक के विद्यार्थियों के लिए सप्ताह में दो विशेष कक्षाएं संचालित की जाती हैं, जहां वे विज्ञान, तकनीक, इंजीनियरिंग और गणित आधारित गतिविधियों में भाग लेते हैं। लैब में बच्चे रोबोट मॉडल, स्मार्ट मशीनें, ड्रोन और स्वचालित उपकरण तैयार कर रहे हैं। कई विद्यार्थी ड्रोन उड़ाना सीख रहे हैं तो कुछ कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहे हैं। यहां बच्चों को केवल मशीन चलाना नहीं सिखाया जाता, बल्कि समस्या का समाधान ढूंढना, टीमवर्क करना और नए विचारों पर प्रयोग करना भी सिखाया जाता है। प्रोजेक्ट तैयार करने से लेकर उसकी रिकॉर्डिंग और प्रस्तुति तक पूरा कार्य विद्यार्थी स्वयं करते हैं, जिससे उनमें आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता विकसित हो रही है।
लैब में लगे रोबोटिक्स किट, सेंसर, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, माइक्रोकंट्रोलर बोर्ड और थ्री-डी प्रिंटर जैसे आधुनिक संसाधन बच्चों की कल्पनाओं को नई उड़ान दे रहे हैं। जब कोई बच्चा पहली बार अपने बनाए रोबोट को चलते हुए देखता है या सेंसर तकनीक को समझता है, तो विज्ञान उसके लिए केवल किताबों का विषय नहीं रह जाता, बल्कि रोमांच और खोज का माध्यम बन जाता है।
आज भारत अंतरिक्ष, रक्षा और आधुनिक तकनीक के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। विशेषज्ञ मानते हैं कि ऐसी प्रयोगशालाएं भविष्य के वैज्ञानिक, डाटा विशेषज्ञ, कृत्रिम बुद्धिमत्ता इंजीनियर और अंतरिक्ष शोधकर्ता तैयार करने की मजबूत नींव बन रही हैं।
कैम्ब्रिज कान्वेंट स्कूल की यह अटल टिंकरिंग लैब अब केवल एक प्रयोगशाला नहीं रही, बल्कि छोटे शहरों के बच्चों के सपनों को विज्ञान के पंख देने वाला मंच बन चुकी है, जहां जिज्ञासा से नवाचार और कल्पना से आविष्कार जन्म ले रहे ।