ज्येष्ठ की तपिश में त्वरित न्याय की ठंडक: 20 कार्यदिवस में 117 मुकदमों का निस्तारण

सुप्रीम कोर्ट की भावना को किया साकार

 

संजय सोनी

झुंझुनू (नवयत्न)। देश के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत एवं न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ द्वारा संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए मामलों के त्वरित निस्तारण के लिए समय-सीमा निर्धारित करने संबंधी निर्देशों की देशभर में चर्चा हो रही है। इसी बीच झुंझुनूं जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में अध्यक्ष मनोज कुमार मील द्वारा अपनाए गए नवाचारों और त्वरित न्याय की कार्यशैली ने आमजन का विशेष ध्यान आकर्षित किया है।

पीड़ित उपभोक्ताओं को शीघ्र राहत उपलब्ध कराने के उद्देश्य से आयोग में स्थापित की गई ‘न्याय टेबल’ तथा प्रत्येक प्रकरण में प्री-काउंसलिंग की व्यवस्था के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। ज्येष्ठ माह की भीषण गर्मी के दौरान आयोग ने न्याय के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करते हुए मई माह में 117 प्रकरणों का निस्तारण किया है।

राजस्थान सरकार के मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास की अध्यक्षता में उपभोक्ता मामले विभाग द्वारा त्वरित न्याय सुनिश्चित करने के लिए नीति निर्धारित की गई थी। इसके अनुपालन में राजस्थान राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने परिपत्र जारी कर प्रत्येक कार्यदिवस पर 1 प्रकरण के निस्तारण को संतोषजनक, 2 प्रकरणों के निस्तारण को अच्छा, 3 प्रकरणों के निस्तारण को बहुत अच्छा तथा 4 प्रकरणों के निस्तारण को उत्कृष्ट कार्य के रूप में रेखांकित किया है।

उल्लेखनीय है कि उपभोक्ता आयोग अध्यक्ष मनोज कुमार मील ने प्रथम राष्ट्रीय लोक अदालत के दौरान प्रत्येक लंबित प्रकरण को प्री-काउंसलिंग प्रक्रिया से गुजारते हुए दोनों पक्षकारों को अपने-अपने स्तर की कानूनी कार्यवाही 15 दिवस में पूर्ण करने के निर्देश दिए थे। इस पहल से मामलों की सुनवाई और निस्तारण की गति में उल्लेखनीय तेजी आई।

राज्य आयोग के परिपत्र की अक्षरशः पालना करते हुए अध्यक्ष मनोज मील ने मई माह के 20 कार्यदिवसों में कुल 117 प्रकरणों का निस्तारण किया। इनमें 101 मामलों में पूर्ण ट्रायल कर निर्णय पारित किए गए, जबकि 16 प्रकरणों का आयोग की न्याय टेबल पर समझाइश और सहमति के माध्यम से निस्तारण किया गया। इस प्रकार ज्येष्ठ माह की प्रचंड गर्मी के बीच आयोग ने पीड़ित उपभोक्ताओं को “न्याय सबके लिए, त्वरित न्याय” की वास्तविक अनुभूति कराते हुए राहत प्रदान की।

कानूनी क्षेत्र से जुड़े जानकारों का मानना है कि न्याय टेबल, प्री-काउंसलिंग और समयबद्ध सुनवाई की यह कार्यप्रणाली उपभोक्ता विवादों के शीघ्र समाधान का प्रभावी मॉडल बनकर उभरी है, जिससे न्याय व्यवस्था में आमजन का विश्वास और अधिक मजबूत हुआ है।

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