सामुदायिक भवन पर कथित अवैध कब्जे का मामला पहुंचा जोधपुर हाईकोर्ट
महावीर पोसवाल सहित पांच प्रतिवादियों को नोटिस
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सुजानगढ़ (नवयत्न)। स्थानीय नया बास स्थित सामुदायिक सभागार और मंदिर पर कथित अवैध कब्जे का मामला अब राजस्थान उच्च न्यायालय जोधपुर पहुंच गया है। इस मामले को लेकर राजस्थान उच्च न्यायालय में चार अधिकारियों तथा महावीर पोसवाल नामक व्यक्ति के खिलाफ जनहित याचिका तीन लोगों की ओर से दायर की गई है। जिस पर राजस्थान हाईकोर्ट की खण्डपीठ ने पांचों प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर दिए हैं।
जनहित याचिका पूसादास, रामरतन, सुरेंद्र सिंह, निवासीगण सुजानगढ़ की ओर से राजस्थान राज्य-जरिये कलेक्टर चूरू, उपखण्ड अधिकारी सुजानगढ़, तहसीलदार-सुजानगढ़, आयुक्त-नगर परिषद सुजानगढ़, महावीर पोसवाल पुत्र दुड़ाराम गुर्जर नया बास, सुजानगढ़ के खिलाफ दायर की गइै है, जो राजस्थान उच्च न्यायालय में सिविल रिट पिटिशन नंबर 13802/2026 पर दर्ज हुई है।
जनहित याचिका में फरियादियों ने न्यायालय को बताया है कि वो सुजानगढ़ के निवासी हैं तथा सार्वजनिक हित का बड़ा विषय होने तथा स्थानीय स्तर पर अधिकारियों द्वारा समुचित रूप से जनहितों की सुरक्षा नहीं करने के कारण उन्हें राजस्थान उच्च न्यायालय की शरण लेनी पड़ी है। न्यायालय को बताया गया है सुजानगढ़ कस्बे के नयाबास में एक सामुदायिक सभागार और शिव शक्ति मंदिर स्थित है और 40 वर्ष पूर्व सुजानगढ़ के पूर्व विधायक 1993-1998 के कार्यकाल के दौरान, स्थानीय निवासियों की मांग पर विधायक निधि से इस परिसर में सामुदायिक सभागार का निर्माण करवाया गया था।
इसके बाद वर्ष 2023-24 में वर्तमान विधायक मनोज मेघवाल ने विधायक निधि से एक सभागार और एक कमरा बनवाया। स्थानीय निवासी इस मंदिर परिसर व सामुदायिक भवन की चाबियां महावीर पोसवाल के पास रखते थे, क्योंकि उनका घर पास में ही था, जो परिसर में साफ.सफाई का भी ध्यान रखते थे। धीरे-धीरे उन्होंने इसी मंदिर परिसर और सामुदायिक सभागार में अपने निजी संगठन का कार्यालय खोल लिया। अब वे इस मंदिर और सामुदायिक सभागार पर निजी अधिकार जता रहे हैं।
महावीर पोसवाल ने उस सार्वजनिक भूमि पर अपना निजी कार्यालय खोलकर उस पर अवैध कब्जा कर लिया है, जिसके कारण मंदिर की नियमित पूजा-अर्चना, धार्मिक गतिविधियां, श्रद्धालुओं की आवाजाही और मंदिर के उचित रखरखाव पर गंभीर रूप से असर पड़ रहा है। मंदिर के लिए भूमि सर्व हिंदू समाज द्वारा कई वर्ष पूर्व आपसी दान के माध्यम से विधिवत खरीदी गई थी, जिसका एकमात्र उद्देश्य सार्वजनिक धार्मिक उपयोग और मंदिर निर्माण था। इसलिए, यह भूमि किसी व्यक्ति की निजी संपत्ति नहीं है, बल्कि एक सार्वजनिक धार्मिक संपत्ति है, जिस पर किसी भी प्रकार का निजी कब्जा अवैध है।
जनहित याचिका में बताया गया है कि इस मामले में चारों प्रतिवादियों अर्थात् जिला कलक्टर, एसडीएम, तहसीलदार व आयुक्त को शिव शक्ति मंदिर और उसमें स्थित सामुदायिक भवन से अवैध और अनधिकृत अतिक्रमण हटाने का आदेश देने की प्रार्थना की गई, लेकिन फिर भी कोई समुचित कार्यवाही इन अधिकारियों ने नहीं की।
न्यायालय को बताया गया है सुजानगढ़ नगर परिषद के आयुक्त द्वारा 26 सितम्बर 2023 को जारी भूमि स्वामित्व प्रमाण पत्र और चूरू जिला परिषद द्वारा 04 सितम्बर 2023 और 04 अक्टूबर को जारी कार्य के लिए तकनीकी और वित्तीय स्वीकृति से स्पष्ट है, यह सम्पति निजी सम्पति नहीं है। 26 सितम्बर 23 के भूमि स्वामित्व प्रमाण पत्र और तकनीकी और वित्तीय स्वीकृति की प्रतियां सामूहिक रूप से जनहित याचिका में संलग्न की गई हैं।
याचिका में अब तक समस्त अधिकारियों को दिये गए समस्त प्रतिवेदनों, समाचार पत्रों में सार्वजनिक सम्पति को मुक्त करवाने सम्बंधी छपे समाचारों आदि का जिक्र करते हुए प्रतिवादी अधिकारियों की कार्रवाई को पक्षपातपूर्ण बताया गया क्योंकि संबंधित अधिकारी भली-भांति जानते हैं कि मंदिर और सामुदायिक भवन सार्वजनिक स्थान हैं, जहाँ किसी का निजी स्वामित्व या अधिकार नहीं हो सकता, फिर भी वे इस संबंध में कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं।
क्या-क्या राहत मांगी गई है उच्च न्यायालय से
इस मामले में जगदीश प्रसाद मीना बनाम राजस्थान राज्य और अन्य सिविल रिट, गुलाब कोठारी बनाम राजस्थान राज्य सविल रिट आदि मामलों के निर्णय का उल्लेख करते हुए सार्वजनिक उपयोग की भूमि पर अतिक्रमण हटाने के लिए तत्काल उचित उचित रिट, आदेश या निर्देश द्वारा प्रतिवादी अधिकारियों को राजस्व अभिलेखों, पुराने दस्तावेजों और स्थल निरीक्षण के आधार पर इस मामले की गहन, निष्पक्ष और समयबद्ध जांच के लिए एक विशेष जांच दल गठित करने का निर्देश दिए जाने, जंच पूरी होने तक सामुदायिक हॉल और मंदिर के रखरखाव, संचालन और प्रबंधन की अस्थायी जिम्मेदारी सुजानगढ़ के उपखंड अधिकारी या तहसीलदार को सौंपे जाने की मांग की गई। इसी प्रकार सामुदायिक भवन और मंदिर की भूमि से संबंधित सभी अभिलेखों और दस्तावेजों को जांच अवधि के दौरान सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक प्रशासनिक निर्देश जारी करने, सामुदायिक भवन और मंदिर की भूमि से अवैध अतिक्रमण हटाने के लिए तत्काल कानूनी कार्रवाई करने तथा जनहित में उचित और न्यायसंगत समझे जाने वाला कोई अन्य आदेश जारी करने की मांगे की गई हैं।
राजस्थान हाईकोर्ट में अब तक क्या हुआ
इस याचिका पर हाई कोर्ट में 2 जुलाई को सिविल रिट पिटिशन पूसादास बनाम राजस्थान राज्य दर्ज की गई है और 6 जुलाई 26 को याचिकाकर्ताओं की ओर से राजस्थान उच्च न्यायालय में अधिवक्ता दीनदयाल चितलांगी, सरकारी अधिवक्ता एएजी राजेश पंवार की ओर से एडवोकेट आयुष गहलोत उपस्थित हुए। सरकारी अधिवक्ता की ओर से जिला कलक्टर, एसडीएम, तहसीलदार, नगरपरिषद आयुक्त के नोटिस स्वीकार किए गए। न्यायमूर्ति पुष्पेंद्र सिंह भाटी, न्यायमूर्ति प्रवीर भटनागर ने प्रतिवादी संख्या 5 महावीर पोसवाल, निवासी सुजानगढ़ को नोटिस जारी किए हैं और सभी प्रतिवादियों से 4 सप्ताह में जवाब तलब किया है।