फिल्टर पानी के नाम पर शहरवासियों की सेहत से खिलवाड़, बेखौफ दौड़ रहीं गाड़ियाँ, प्रशासन बेखबर
बाबूलाल वर्मा
झुंझुनू (नवयत्न)। शहर में इन दिनों शुद्ध पानी के नाम पर लोगों के स्वास्थ्य के साथ खुलेआम खिलवाड़ किया जा रहा है। रोजाना सुबह-सुबह शहर की गलियों और मुख्य मार्गों पर सैंकड़ों की संख्या में फिल्टर पानी की टंकी ले जाती गाड़ियाँ दौड़ती नज़र आती हैं। घर, दफ़्तर, दुकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में इस पानी की बेरोकटोक सप्लाई हो रही है, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या यह पानी वास्तव में फिल्टर है या महज़ एक छलावा?
यह सप्लायर पैकेज्ड वाटर या वाटर प्यूरिफिकेशन के नाम पर मोटी रकम वसूल रहे हैं, लेकिन पानी की गुणवत्ता मानकों पर पूरी तरह से संदेहास्पद है।

आज तक संबंधित स्वास्थ्य विभाग द्वारा इन सप्लाई करने वाली गाड़ियों और सप्लायरों की कोई जांच नहीं की गई है।
प्लांट में पानी कहाँ से भरा जा रहा है? प्लांट में लगे फिल्टर समय पर बदले जा रहे हैं या नहीं? प्लांट परिसर में साफ़-सफ़ाई के मानकों का पालन हो रहा है या नहीं? इस बात की निगरानी करने वाला कोई नहीं है।
जिन प्लास्टिक की टंकियों में पानी सप्लाई किया जाता है, उनमें से कई अत्यधिक गन्दी, पुरानी और बिना धुली ही बार-बार इस्तेमाल कि जा रही हैं।
ये स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा है अशुद्ध या बैक्टीरिया-युक्त पानी पीने से उल्टी, दस्त, पीलिया, टाइफाइड और पेट से जुड़ी गंभीर बीमारियां होने का खतरा बना रहता है। लोग यह सोचकर यह पानी खरीद रहे हैं कि यह उनके परिवार को बीमारियों से बचाएगा, जबकि हकीकत इसके उलट भी हो सकती है।
शहरवासियों और जागरूक नागरिकों का कहना है कि प्रशासन और संबंधित विभागों को नींद से जागना चाहिए। लोगों की सेहत की सुरक्षा के लिए ठोस कदम तुरंत उठाए जाने चाहिए
पानी के प्लांटों पर औचक छापेमारी कर स्वच्छता और फिल्टर प्रक्रिया की जांच हो।
सप्लायरों के पानी के सैंपल लेकर सरकारी लैब में जांच के लिए भेजे जाएं।
केवल उन्हीं सप्लायरों को अनुमति मिले जिनके पास वैध लाइसेंस और गुणवत्ता प्रमाण पत्र हो।
जब तक प्रशासन पानी के इन नमूनों की नियमित जांच नहीं करता, तब तक कोई कैसे मान ले कि यह पानी पीने योग्य है? क्या विभाग किसी बड़ी महामारी या बीमारी के फैलने का इंतजार कर रहा है ?