प्रयोगशाला जांचों से रोग निदान की नई दिशा पर मंथन
निसं
जयपुर (नवयत्न)। राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान, जयपुर के रोग निदान एवं विकृति विज्ञान स्नातकोत्तर विभाग की ओर से डॉ. बी. लाल क्लिनिकल लेबोरेटरी के सहयोग से 11वें आयुर्वेद दिवस के अवसर पर प्रयोगशाला चिकित्सा में रोग निदान की नई दिशा: हीमोग्राम की चिकित्सकीय समीक्षा एवं आणविक जीव विज्ञान की मूल अवधारणाएं विषय पर एक दिवसीय सीएमई आयोजित की गई। इसमें करीब 250 प्रतिभागियों ने पंजीकरण कराया। सीएमई में शिक्षकों, स्नातकोत्तर व पीएचडी शोधार्थियों, प्रयोगशाला कर्मियों तथा स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े प्रतिभागियों ने भाग लिया। डॉ. बी. लाल क्लिनिकल लेबोरेटरी के प्रयोगशाला निदेशक एवं प्रयोगशाला चिकित्सा उत्कृष्टता केंद्र के प्रमुख डॉण् करण मौर्य ने सीबीसी की चिकित्सकीय व्याख्या पर जानकारी देते हुए कहा कि रक्त जांच में किसी एक मान के बढ़ने या घटने के आधार पर निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए। मरीज के लक्षण, स्वास्थ्य स्थिति और अन्य जांचों को ध्यान में रखकर रिपोर्ट की समग्र व्याख्या जरूरी है। आणविक जीनोमिक्स उत्कृष्टता केंद्र के निदेशक एवं प्रमुख डॉ. संदीप श्रीवास्तव ने आणविक जीनोमिक्स, नवाचार एवं रोग निदान की संभावनाओं पर आधुनिक आणविक निदान तकनीकों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इन तकनीकों से रोगों की पहचान, शोध और उपचार संबंधी बेहतर निर्णयों की संभावनाएं बढ़ रही हैं। प्रोफेसर सुरेंद्र कुमार शर्मा, देवेंद्र लढ्ढा सहित विशेषज्ञों ने कहा कि आधुनिक प्रयोगशाला चिकित्सा रोगों की सही और समय पर पहचान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। आणविक निदान के क्षेत्र में हो रहे विकास से रोग पहचान और वैज्ञानिक शोध के लिए नई संभावनाएं सामने आ रही हैं। सीएमई से स्नातकोत्तर व पीएचडी शोधार्थियों को आधुनिक प्रयोगशाला जांच और शोध की नई अवधारणाओं की जानकारी मिलीए वहीं शिक्षकों को शिक्षण व शोध में आधुनिक जांच पद्धतियों को शामिल करने का अवसर मिला।