बाड़ाबंदी शुरू, एसएसी आरक्षित चेयरमैन की कुर्सी पर निर्दलीय तय करेंगे खेल
अशोक राईका
बुहाना (नवयत्न)। नगर पालिका चुनाव में मतदान खत्म होने के अगले ही दिन बुहाना की राजनीति गरमा गई है। 14 सितंबर को मतगणना होनी है, लेकिन उससे पहले ही भाजपा और कांग्रेस ने अपने-अपने पार्षदों को साधने की कवायद शुरू कर दी है। दोनों दलों ने बाड़ाबंदी शुरू कर दी है। ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि 20 वार्डों वाली बुहाना नगर पालिका का पहला चेयरमैन किस खेमे से होगा? सूत्रों के अनुसार कांग्रेस के उम्मीदवारों को गाडिय़ों में बैठाकर एक साथ पिलानी विधायक श्रवण कुमार के पास ले जाया गया है। कांग्रेस खेमे ने अपने पार्षदों को एकजुट रखने की रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। दूसरी ओर भाजपा ने भी 18 उम्मीदवारों की बाड़ाबंदी की है। चुनाव परिणाम आने से पहले ही दोनों दल अपने-अपने पार्षदों को सुरक्षित रखने में जुट गए हैं।
भाजपा-कांग्रेस के 8-8 सीटों के दावे
बुहाना नगर पालिका में कुल 20 वार्ड हैं। राजनीतिक आंकड़ों और स्थानीय चर्चाओं के मुताबिक भाजपा और कांग्रेस दोनों के खाते में 8-8 सीटें आने का दावा किया जा रहा है। ऐसे में बाकी सीटों पर निर्दलीयों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाएगी। यही वजह है कि चुनाव परिणाम से पहले ही निर्दलीय पार्षदों पर सबकी नजर है। यदि भाजपा और कांग्रेस के आंकड़े 8-8 पर टिकते हैं तो चेयरमैन की कुर्सी तक पहुंचने के लिए दोनों दलों को निर्दलीयों का समर्थन हासिल करना होगा।
चेयरमैन पद एससी के लिए आरक्षित
बुहाना नगर पालिका के अध्यक्ष का पद अनुसूचित जाति (एससी) के लिए आरक्षित है। इसलिए केवल बहुमत का आंकड़ा ही काफी नहीं होगा, बल्कि यह भी अहम होगा कि जीतकर आने वाले एससी वर्ग के पार्षद किस खेमे में हैं और किसके पास अध्यक्ष पद के लिए जरूरी समर्थन जुटता है। मतगणना के बाद तस्वीर साफ होगी, लेकिन उससे पहले शुरू हुई बाड़ाबंदी ने मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है। भाजपा और कांग्रेस दोनों अपने-अपने पार्षदों को एकजुट रखने में जुटे हैं, जबकि निर्दलीयों की भूमिका पर भी नजरें टिकी हैं।
नतीजे 14 को, लेकिन खेल से शुरू
बुहाना में अब मुकाबला सिर्फ वार्ड जीतने तक सीमित नहीं है। असली लड़ाई नगर पालिका अध्यक्ष की कुर्सी के लिए है। 14 सितंबर को ईवीएम खुलेंगी और सीटों की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी। इसके बाद समर्थन जुटाने और अध्यक्ष पद के लिए समीकरण बनाने का दौर और तेज होने की संभावना है। फिलहाल भाजपा और कांग्रेस दोनों अपने-अपने आंकड़ों को मजबूत मान रहे हैं। लेकिन 8-8 के दावों के बीच निर्दलीय किसके साथ जाएंगे और एससी आरक्षित अध्यक्ष की कुर्सी पर किसका चेहरा बैठेगा—इसका जवाब 14 सितंबर के नतीजों के बाद ही मिलेगा।