बिसाऊ में 40 साल पुरानी जलभराव की समस्या के समाधान की जगी उम्मीद
विनोद प्रजापति
बिसाऊ (नवयत्न)। कस्बे के वार्ड नंबर 5 और 6 में गैनाणी (गोचिया री बाड़ी) के गंदे पानी की निकासी की समस्या के समाधान की उम्मीद जगी है। लंबे समय से जलभराव की परेशानी झेल रहे वार्डवासियों को राहत दिलाने के लिए पार्षद सलीम सैय्यद ने शनिवार को नगर पालिका अधिकारियों और संबंधित लोगों के साथ मौके का निरीक्षण किया। इस दौरान जल निकासी की समस्या के समाधान को लेकर चर्चा की गई। मौके पर नगर पालिका ईओ सीताराम कुमावत, नगर कांग्रेस अध्यक्ष एडवोकेट अयूब खान, ठेकेदार सद्दाम और नगर पालिका जेईएन सौमंत कुमार मौजूद रहे। ईओ और चेयरमैन प्रतिनिधि ने जल निकासी की समस्या दूर करने का आश्वासन दिया। हालांकि अब वार्डवासियों को समाधान के लिए ठोस कार्ययोजना बनने और काम शुरू होने का इंतजार है।
चार दशक से परेशानी झेल रहे लोग
स्थानीय लोगों के अनुसार गैनाणी में गंदे पानी के भराव और निकासी की समस्या करीब 40 साल से बनी हुई है। इसके चलते क्षेत्र के लोगों को लंबे समय से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पूर्व पालिका अध्यक्ष हारुन खत्री ने भी अपने कार्यकाल में समस्या के समाधान के लिए अपने खेत से गंदे पानी की निकासी की व्यवस्था की थी। इसके बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया।
चुनाव में भी उठा था मुद्दा
स्थानीय लोगों का कहना है कि विधानसभा चुनाव 2023 के दौरान क्षेत्रीय विधायक रीटा चौधरी ने वार्ड सभा में जल निकासी की समस्या को प्राथमिकता से हल करवाने का आश्वासन दिया था। लोगों को उम्मीद थी कि इसके बाद समस्या का स्थायी समाधान होगा, लेकिन उनके अनुसार अब तक राहत नहीं मिली है। नगर पालिका चुनाव 2026 से पहले भी यह मुद्दा सोशल मीडिया पर चर्चा में रहा था।
जनप्रतिनिधियों के सामने समाधान की चुनौती
नगर पालिका में कांग्रेस की सलमा सैय्यद अध्यक्ष और भाजपा की जुलेखा खत्री उपाध्यक्ष हैं। ऐसे में वार्डवासियों को उम्मीद है कि सभी जनप्रतिनिधि मिलकर समस्या के समाधान के लिए प्रयास करेंगे। इस मामले में क्षेत्रीय विधायक रीटा चौधरी, पार्षद सलीम सैय्यद, उपाध्यक्ष प्रतिनिधि हारुन खत्री और वार्ड पार्षद आबिद तंवर व अहमद राजा की भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी। वार्डवासियों की मांग है कि केवल मौका मुआयना और आश्वासन देने के बजाय जल निकासी की स्थायी व्यवस्था की जाए। अब देखना होगा कि सर्वे के बाद समस्या के समाधान के लिए क्या कार्ययोजना बनाई जाती है और काम कब शुरू होता है। करीब चार दशक से परेशानी झेल रहे लोगों को अब राहत का इंतजार है।