एनजीटी के आदेश पर काटली नदी बहाव क्षेत्र में सीमांकन के साथ 2 माह में हटेंगे सभी अतिक्रमण

संजय सोनी

झुंझुनूं/उदयपुरवाटी/गुढ़ागौड़जी (नवयत्न)। राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण के आदेश पर अब काटली नदी बहाव क्षेत्र का दो माह की समय अवधि में सीमांकन कर सभी अतिक्रमणों को हटा कर जल निकायों की रक्षा की जाएगी ।

शेखावाटी की जल जीवन दायिनी काटली नदी के संरक्षण एवम संवर्द्धन हेतु सरस्वती रूरल एन्ड अरबन डवलपमेंट झुंझुनूं की ओर से “काटली नदी बचाओ जन अभियान ” संयोजक सुभाष कश्यप के अनुसार एनजीटी (राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण) में यह निष्पादन आवेदन (Execution Application) मूल आवेदन प्रकरण संख्या 59/2024 में दिनांक 12 अगस्त 2024 अमित कुमार कैलाश मीणा बनाम राज्य व अन्य के आदेश को लागू करने के लिए दायर किया गया था उक्त निष्पादन आवेदन में दिनांक 7 अप्रैल 2026 को न्यायाधिकरण ने आदेश पारित कर काटली नदी को पुनर्जीवित करने हेतु आदेश दिए हैं।

एनजीटी ने पिछले आदेश में जल संसाधन विभाग को जिला प्रशासन और राजस्व विभाग के सहयोग से नदी तल की पहचान करने,रिपोर्ट प्रकाशित करने और अतिक्रमण हटाने का निर्देश दिया गया था ।

पाकिस्तान व भारत के बीच आपरेशन सिंदूर के समय रद्द हुए सिंधु जल समझौते का शेष जल अब राजस्थान की काटली नदी सहित अन्य नदियों में लाने हेतु काटली नदी बचाओ जन अभियान संयोजक सुभाष कश्यप द्वारा नदी को पुनर्जीवित करने हेतु जन अभियान चलाया जा रहा है जिस पर राजस्थान सरकार ने कार्यवाही करते हुए नदी क्षेत्र का ड्रोन सर्वे भी करवाया है । एनजीटी, भारत सरकार, राजस्थान सरकार व जन मानस की मंशा अनुसार अब यह नदी पुनर्जीवित होने की ओर है।

मामले की पृष्ठभूमि

प्रकरण: यह निष्पादन आवेदन (Execution Application) मूल आवेदन संख्या 59/2024 में दिए गए 12 अगस्त, 2024 के आदेश को लागू करने के लिए दायर किया गया था ।

मुख्य निर्देश: पिछले आदेश में जल संसाधन विभाग को जिला प्रशासन और राजस्व विभाग के सहयोग से नदी तल की पहचान करने, रिपोर्ट प्रकाशित करने और अतिक्रमणों को हटाने का निर्देश दिया गया था । अब एनजीटी न्यायधीश व न्यायायिक सदस्य सिओ कुमार सिंह एवम विशेषज्ञ सदस्य डॉ. प्रशांत गर्ग ने पुनः महत्वपूर्ण आदेश पारित कर सीकर झुंझुनूं व चूरु की जल जीवन रेखा काटली नदी को बचाने का मार्ग प्रसस्त किया है ।

विभिन्न तहसीलों में की गई कार्रवाई

राजस्थान राज्य सरकार और जल संसाधन विभाग द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट के अनुसार निम्नलिखित कदम उठाए गए हैं:

तहसील उदयपुरवाटी: ग्राम बागोली और काटलीपुरा में पहचाने गए सभी 34 अतिक्रमणों को हटा दिया गया है । इसमें 13 दुकानें और 1 पक्का मकान शामिल था, जिन्हें 11 दिसंबर, 2025 को पुलिस सहायता से हटाया गया ।

तहसील झुंझुनू: ग्राम भदुंडा कलां के विभिन्न खसरा नंबरों से 12 दिसंबर, 2025 को तारबंदी और कच्चे-पक्के निर्माण हटाए गए । तहसील गुढ़ा गौड़जी: यहाँ कुल 108 अतिक्रमणों में से 95 को हटा दिया गया है । 81 मामलों में खड़ी फसलों की नीलामी करके बेदखली की गई ।
तहसील चिड़ावा: 20 अतिक्रमणों की पहचान की गई है और राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम, 1956 की धारा 91 के तहत कार्रवाई शुरू की गई है । इनका भौतिक निष्कासन 27 फरवरी, 2026 के लिए निर्धारित किया गया था ।
तहसील हमीरवास बड़ा (चूरू): 5 दिसंबर, 2025 को ग्राम बुढवास में तारबंदी और बाड़ जैसे अस्थायी अतिक्रमणों को हटाया गया ।

तहसील खेतड़ी: जाँच के दौरान इस तहसील में काटली नदी के बहाव क्षेत्र में कोई अवैध अतिक्रमण नहीं पाया गया ।

पुनर्वास और शेष चुनौतियाँ कालवेलिया/बंजारा समुदाय: गुढ़ा गौड़जी तहसील के ग्राम खटकड़ और भाटीवाड़ में 13 अतिक्रमण अभी शेष हैं, क्योंकि ये कालबेलिया और बंजारा समुदायों के रिहायशी मकान हैं ।

स्थगन: प्रशासन उनके लिए वैकल्पिक पुनर्वास की व्यवस्था कर रहा है, जिसके पूरा होते ही इन्हें हटा दिया जाएगा ।

अदालत का अंतिम निर्णय

समय सीमा: राज्य सरकार के वकील ने आश्वासन दिया कि शेष सभी अतिक्रमणों को दो महीने के भीतर हटा दिया जाएगा ।

निर्देश: ट्रिब्यूनल ने अधिकारियों को आदेश दिया कि वे नदी के बहाव क्षेत्र का सीमांकन करें, पहचान सुनिश्चित करें और दो महीने के भीतर जल निकायों की रक्षा करें ।

निस्तारण: इन निर्देशों के साथ निष्पादन आवेदन (E.A. No. 03/2025) को निस्तारित (disposed of) कर दिया गया है ।

न्यायाधीश: जस्टिस सीओ कुमार सिंह और डॉ. प्रशांत गर्गव विशेषज्ञ सदस्य ।

You might also like