चिकित्सकों का आक्रोश: प्रशासनिक अधिकारियों की ओर से अभ्रद व्यवहार को लेकर प्रदर्शन
निजी चिकित्सालयों के लिए जारी को स्पष्ट गाइड लाइन
चूरू,(पीयूष शर्मा)8 मई। राज्य में चिकित्सकों के साथ लगातार हो रही अभद्र व्यवहार की घटनाओं से व्यथित राजकीय व निजी अस्पताल के चिकित्सकों ने आठ मई को शहर के राजकीय डेडराज भरतिया अस्पताल परिसर में प्रदर्शन कर आक्रोश जताया।
काली पट्टी बांधकर प्रदर्शन कर रहे चिकित्सकों का कहना था कि कोरोना महामारी के खिलाफ देशभर में चल रही जंग में हरावल दस्ते के रूप में काम कर रहे कोरोना वॉरियर्स चिकित्सकों के साथ इस तरह की घटनाएं निंदनीय है। वैश्विक महामारी के इस मुश्किल दौर में सीएमएचओं से लेकर चिकित्सक के साथ ब्यूरोक्रेसी के अधिकारी अभद्र भाषा का उपयोग कर उन्हें अपमानित कर रहे हैं। अजमेर, पीलीबंगा, हनुमानगढ़, भरतपुर व अजमेर में हुई इस तरह की घटनाओं के दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाए। ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए कानून बनाया जाए। ऐसा नहीं किए जाने की स्थिति में अब अभद्र व्यवहार किया गया तो चिकित्सक मजबूरन बड़े आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे। निजी चिकित्सकों के साथ सौतेले व्यवहार की बात कहते हुए कहा कि अस्पष्ट गाइडलाइन जारी की जा रही है। अपमानजनक व्यवहार किया जा रहा है। इसे चिकित्सक बर्दाश्त नहीं करेंगे। प्रदर्शन करने वालों में भरतिया अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक डा. एफएच गौरी, आईएमए अध्यक्ष डा. बीएल नायक, एलएन मेमोरियल शिवम ऑर्थो एवं जनरल हॉस्पिटल के डा. महेश शर्मा सहित अनेक चिकित्सक शामिल थे।
क्षतिपूर्ति भत्ते की बजाय दर्ज करवाई जा रही एफआईआर
चिकित्सकों का कहना था कि निजी चिकित्सक यदि किसी मरीज के उपचार के दौरान अथवा काम के दौरान कोरोना संक्रमित हो जाए तो उसे किसी तरह का अलाउंस या क्षतिपूर्ति भत्ता नहीं दिया जा रहा है। इसके विपरीत डॉक्टरों के खिलाफ एफआइआर कराई जा रही है। ऐसी घटनाओं को चिकित्सक समुदाय बर्दाश्त नहीं करेगा।