गांव की शादी पर ‘दो सिलेंडर’ की सीमा, शहर में तीन की छूट — प्रशासन के फैसले पर उठे सवाल
जय जांगिड़
झुंझुनू (नवयत्न)। जिला प्रशासन के हालिया निर्देशों ने गांव और शहर के बीच भेदभाव की बहस को हवा दे दी है। गांवों में होने वाली शादियों के लिए जहां केवल दो वाणिज्यिक गैस सिलेंडर की अनुमति दी गई है, वहीं शहरी क्षेत्र में तीन सिलेंडर तक की मंजूरी दी जा रही है। इस फैसले को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी देखी जा रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि शादियों में आमतौर पर सैकड़ों मेहमान जुटते हैं और दो सिलेंडर में भोजन बनाना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में या तो खाना कम पड़ने का डर रहता है या फिर लोगों को अतिरिक्त इंतजाम “गुपचुप” करने पड़ते हैं, जो नियमों के उलट है।
इस मुद्दे पर कई लोग महात्मा गांधी के उस कथन को याद कर रहे हैं, जिसमें उन्होंने कहा था कि “भारत की आत्मा गांवों में बसती है।” ग्रामीणों का सवाल है कि जब देश की बड़ी आबादी गांवों में रहती है, तो फिर सुविधाओं और अनुमति में यह असमानता क्यों?
दूसरी ओर, शहरी क्षेत्रों में तीन सिलेंडर की छूट को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का तर्क है कि शहरों में वैकल्पिक साधन और संसाधन अधिक उपलब्ध हैं, जबकि गांवों में सीमित संसाधनों के बीच ही बड़े आयोजन होते हैं। ऐसे में गांवों पर सख्ती और शहरों को राहत देना दोहरे मापदंड जैसा प्रतीत होता है।
प्रशासन की ओर से अब तक इस अंतर के पीछे स्पष्ट कारण सामने नहीं आया है, लेकिन बढ़ती नाराजगी के बीच ग्रामीणों ने नियमों में समानता और व्यावहारिक बदलाव की मांग उठाई है।
ग्रामीणों का कहना है कि या तो गांव और शहर दोनों के लिए एक समान नियम लागू किए जाएं, या फिर गांवों की परिस्थितियों को देखते हुए सिलेंडर की सीमा बढ़ाई जाए, ताकि शादी जैसे सामाजिक आयोजनों में अनावश्यक परेशानी न हो।