आदिवासी, आदिमजाति समुदाय को पृथक जनगणना कॉलम दिए जाने की उठी मांग

महेंद्र खडोलिया
श्रीमाधोपुर (नवयत्न) । भारतीय जनगणना में देश के आदिवासी, आदिमजाति समुदाय को पृथक जनगणना कॉलम की मांग राजस्थान प्रदेश आदिवासी कांग्रेस की ओर से पुरजोर उठाने के तहत गुरुवार को राजस्थान प्रदेश आदिवासी कांग्रेस संभागीय प्रभारी कैलाशी मीणा के नेतृत्व में विभिन्न जिलाध्यक्षों एवं कार्यकर्ताओं के साथ जयपुर संभागीय आयुक्त को राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा है। इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि भारत का आदिवासी आदिमजाति समुदाय जिसको ट्राइब, ट्राईबल, आदिवासी आदि नामो से जाना जाता है। इनकी सभी धर्मो से पृथक अपनी सांस्कृतिक पहचान है। उन्होंने कहा कि 1950 में संविधान लागू होने से पहले शीडयूल्ड डिस्ट्रिक्ट एक्ट 1874, भारत सरकार अधिनियम 1919 ओर भारत सरकार अधिनियम 1935 में पृथक धर्म कोड आवंटित था। नीमकाथाना जिलाध्यक रामनिवास मीणा ने कहा कि आदिम जाति आदिवासी को सर्व प्रथम 1871 से लेकर 1950 तक की जनगणना में पृथक धर्म कोड ओर जनगणना कॉलम दिया गया था। झुंझुनूं जिलाध्यक्ष रतन लाल मीणा ने कहा कि सप्रीम कोर्ट के कैलाश बनाम महाराष्ट्र सरकार के फैसले में भी आदिमजाति आदिवासी को भारत का मूल निवासी मान कर आदिवासी को मूल निवासी ओर शेष 92 प्रतिशत मूलनिवासियों को बाहरी अप्रवासी बताया गया है।
ज्ञापन में लिखा है कि साक्ष्य के आधार पर भारत वर्ष के आदिवासी आदिमजाति की संस्कृति के सुरक्षित रखने के लिए भारत के आदिवासियों का जनगणना कॉलम पृथक दिए जाने की मांग की। इस दौरान नीमकाथाना जिलाध्यक्ष रामनिवास मीणा, जयपुर शहर अध्यक्ष रेखा करोल, कोटपुतली बहरोड़ अध्यक्ष जगदीश मीणा, झुंझुनूं जिलाध्यक्ष रतन लाल मीणा, नरेंद्र मीणा अजमेरी, जितेंद्र जेफ नयाबास, अनिल मीणा, बलराम मीणा समेत अनेक कार्यकर्ता उपस्थित थे।

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