भागवत कथा का दूसरा दिन: प्रभु से बढ़कर कोई और सुख और सम्पदा नहीं
ललित दाधीच
राजलदेसर (नवयत्न) । राजलदेसर के माली सैनी भवन में स्व. ईशरराम व सुखी देवी खडोलिया की पुण्य स्मृति में परिवारजनों द्वारा आयोजित सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा के दूसरे दिन शुकदेवजी के जन्म का वृत्तांत विस्तार से वर्णित किया गया। कथा वाचक दण्डी स्वामी शिवेन्द्राश्रम महाराज ने कथा का शुभारंभ करते हुए कहा कि आप सभी पर ठाकुर जी की विशेष कृपा है, जिसके कारण आप कथा का आनंद ले रहे हैं और श्रीमद् भागवत का रसपान कर पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि भगवान जिसे जितना प्रदान करते हैं, उसे उतना ही प्राप्त होता है। उन्होंने मानव जीवन के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह जीवन केवल विषय-वस्तुओं के भोग के लिए नहीं मिला है, लेकिन आज का मानव भक्ति मार्ग को छोड़कर सांसारिक सुखों में लिप्त हो गया है। मानव जीवन का वास्तविक उद्देश्य भगवान श्रीकृष्ण की प्राप्ति है। दण्डी शिवेन्द्राश्रम महाराज ने कहा कि यदि हम दृढ़ निश्चय कर लें कि जीवन में हमें कृष्ण को ही पाना है, तो इससे बढ़कर हमारे लिए कोई सुख, संपत्ति या समृद्धि नहीं हो सकती। इस अवसर पर यजमान नंदलाल खडोलिया सहपत्नीक सहित सांवरमल, बाबुलाल, शंकरलाल, बनवारीलाल, निर्मल सैनी, इन्द्रचंद देवड़ा, राजेंद्र, सुरेंद्र टाक, ललित दाधीच, नथमल सैनी, रामगोपाल, मूलचंद दाधीच, परमेश्वर फोगला, रोहित मारू, परमानंद प्रजापत, महावीर कटारिया, पंडित देवकीनंदन दाधीच, पुरुषोत्तम मारू सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुगण उपस्थित रहे।