दो पारीक परिवारों का समाज विकास के लिए भव्य एवं अनुकरणीय संकल्प

श्रीराम तिवाड़ी
नोखा (नवयत्न)। बीकानेर की जयपुर रोड पर छ: न्याति समाज की महत्वपूर्ण लोकेशन पर लगभग पांच बीघा विशाल भूखंड में एक भव्य, बहुआयामी एवं दूरदर्शी सामाजिक परिसर का निर्माण तेजी से प्रगति पर है। यह परिसर आने वाली पीढिय़ों के लिए शिक्षा, संस्कार, रोजगार, सामाजिक गतिविधियों और आत्मनिर्भरता का महत्वपूर्ण केंद्र बनने जा रहा है। संस्थान के महामंत्री ओंकारमल शर्मा ने बताया कि विशाल भूखंड पर प्रथम चरण में लगभग 120 गुणा 140 वर्गफीट क्षेत्रफल में आठ मंजिला भव्य भवन का निर्माण कार्य जारी है। इसमें अतिथि निवास के 25 कमरे, छात्रावास के 125 कमरे, 7 डॉरमेट्री तथा दो विशाल हॉल सहित विभिन्न सामाजिक एवं उपयोगी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं।
शिक्षा को समर्पित होगा दूसरा चरण
परिसर के दूसरे चरण में लगभग 105.4 गुणा 140 क्षेत्रफल में छह मंजिला शैक्षणिक ब्लॉक प्रस्तावित है। इसमें संस्कृत पाठशाला, विभिन्न प्रतियोगी एवं शैक्षणिक पाठ्यक्रमों की कोचिंग, राष्ट्रीय शिक्षा नीति आधारित आधुनिक शैक्षणिक गतिविधियां, एआई, कोडिंग तथा स्किल डेवलपमेंट सेंटर जैसी सुविधाएं विकसित करने की योजना है। यह पहल महज भवन निर्माण तक सीमित नहीं है बल्कि नई पीढ़ी को अपनी परंपरा और संस्कारों से जोड़ते हुए आधुनिक शिक्षा, तकनीक एवं रोजगारपरक कौशल से सशक्त बनाने की दूरदर्शी सोच का हिस्सा है।
सामाजिक आत्मनिर्भरता की दिशा में अनूठा मॉडल
परिसर में लगभग 120 गुणा 106.6 क्षेत्रफल में सात मंजिला व्यावसायिक ब्लॉक का भी निर्माण प्रस्तावित है। इसका उद्देश्य सामाजिक संस्था को स्थायी एवं मजबूत आर्थिक आधार उपलब्ध कराना है। व्यावसायिक गतिविधियों से प्राप्त आय का उपयोग तहसील मुख्यालय से लेकर ब्लॉक स्तर तक विभिन्न सामाजिक एवं शैक्षणिक केंद्रों के संचालन में किया जा सकेगा। इस व्यवस्था से संस्था को नियमित आय का स्रोत उपलब्ध होने की संभावना है। भविष्य में इससे वार्षिक आय करोड़ों रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। ऐसे में यह परिसर सामाजिक क्षेत्र में आत्मनिर्भरता का अनुकरणीय और अभिनव मॉडल बन सकता है।
नोखा के पारीक परिवारों ने लिया मंदिर निर्माण का संकल्प
इसी विशाल परिसर के जयपुर रोड स्थित उत्तर-पूर्वी कॉर्नर पर गांधी चौक नोखा के पारीक बंधुओं ने धार्मिक एवं सांस्कृतिक चेतना को समर्पित श्रीहनुमानजी एवं भगवान श्रीपरशुरामजी के भव्य मंदिरों के निर्माण का संकल्प लिया है। दोनों मंदिरों के निर्माण पर लगभग 14 लाख रुपये की लागत आने की बात कही गई है और निर्माण कार्य अब अंतिम चरण में पहुंच गया है। विप्र फाउंडेशन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अशोक पारीक ने अपने पूज्य माता-पिता स्वर्गीय रामेश्वर लाल एवं स्वर्गीय गीता देवी पारीक की पावन स्मृति में भगवान श्रीपरशुराम मंदिर निर्माण का संकल्प लिया है। वहीं विप्र फाउंडेशन के राष्ट्रीय महामंत्री पवनकुमार पारीक ने अपने स्वर्गीय पिता बजरंग लाल पारीक की स्मृति में श्रीहनुमान मंदिर के निर्माण का संकल्प लेकर उसे मूर्त रूप दिया है। दोनों संकल्प केवल मंदिर निर्माण तक सीमित नहीं हैं, बल्कि माता-पिता की स्मृति को चिरस्थायी बनाने, सनातन संस्कारों के संरक्षण तथा समाज के प्रति सेवा और समर्पण की भावपूर्ण अभिव्यक्ति हैं।
सामाजिक गतिविधियों में भी सक्रिय भूमिका
विशेष उल्लेखनीय है कि अशोक पारीक एवं पवनकुमार पारीक विप्र फाउंडेशन में राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन करने के साथ-साथ छ: न्याति ब्राह्मण महासंघ की सामाजिक गतिविधियों में भी निरंतर सक्रिय एवं समर्पित भूमिका निभा रहे हैं। पारीक परिवारों द्वारा धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक एवं शैक्षणिक विकास के लिए किए जा रहे इन प्रयासों को समाज में सकारात्मक और प्रेरणादायी पहल के रूप में देखा जा रहा है।
26 अगस्त को भामाशाह सम्मान एवं संरक्षक बैठक
महासंघ के महामंत्री ओंकारमल शर्मा ने बताया कि 26 अगस्त को महासंघ की भूमि पर भामाशाह सम्मान एवं संरक्षक बैठक का आयोजन किया जाएगा। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विप्र फाउंडेशन के संस्थापक सुशील ओझा होंगे जबकि अध्यक्षता विप्र फाउंडेशन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अशोक पारीक करेंगे। कार्यक्रम में विधायक ताराचंद सारस्वत, विधायक जेठानंद व्यास, पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ बीडी कल्ला एवं भाजपा जिलाध्यक्ष श्याम पंचारिया का सानिध्य प्राप्त होगा। विशिष्ट अतिथियों के रूप में श्रीधर शर्मा, बरपेटा रोड, असम, सत्यनारायण भारद्वाज, ओमप्रकाश जोशी एवं हरिगोपाल उपाध्याय उपस्थित रहेंगे। कार्यक्रम महासंघ की भूमि पर सायं 5 बजे आयोजित होगा। कार्यक्रम के संयोजक महासंघ के पवनकुमार पारीक, नोखा होंगे।
यह केवल भवन नहीं, आने वाली पीढिय़ों का भविष्य
बीकानेर की धरती पर आकार ले रहा यह विशाल परिसर समाज की सामूहिक सोच, भामाशाहों के समर्पण और दूरदर्शी नेतृत्व का प्रतीक बन रहा है। शिक्षा से संस्कार, संस्कार से सेवा और सेवा से आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ता यह प्रयास आने वाली पीढिय़ों के लिए एक ऐसी विरासत तैयार करने की ओर कदम है, जिस पर पूरा समाज गर्व कर सके। नोखा के पारीक परिवारों द्वारा मंदिर निर्माण के इन अनुकरणीय संकल्पों ने इस सामाजिक परिसर की धार्मिक एवं सांस्कृतिक भावना को भी मजबूती प्रदान की है। समाज के विकास, शिक्षा, सेवा और संस्कार के लिए किए जा रहे ऐसे समर्पण निश्चित रूप से नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेंगे।

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