अपना घर आश्रम की सेवा से दो वर्षों बाद मिला बिछड़ा बेटा अपने पिता से
श्रीराम तिवाड़ी
नोखा (नवयत्न) । अपना घर आश्रम नोखा ने एक बार फिर मानवता, सेवा और संवेदनशीलता की अद्भुत मिसाल प्रस्तुत की है। दिनांक 28-04-2025 को जोधपुर रेलवे स्टेशन पर ड्यूटी के दौरान सहायक उप निरीक्षक अजीत खान को लगभग 60 वर्षीय एक वृद्धजन मिले, जो अपना नाम-पता बताने में असमर्थ थे तथा बोलने-सुनने में भी कठिनाई महसूस कर रहे थे। काफी प्रयासों के बाद भी उनकी पहचान नहीं हो सकी, जिसके बाद पुलिस प्रशासन द्वारा संपर्क कर उन्हें अपना घर आश्रम नोखा भेजा गया।
आश्रम में प्रभुजी की निरंतर सेवा, देखभाल, भोजन, चिकित्सा एवं अन्य सभी आवश्यक सुविधाओं की उचित व्यवस्था की गई। आश्रम परिवार ने उन्हें अपने परिवार के सदस्य की तरह स्नेह और सम्मान दिया। इसी दौरान अपना घर आश्रम नोखा द्वारा सोशल मीडिया एवं इंस्टाग्राम पर प्रभुजी से संबंधित एक रील साझा की गई।
यह रील उत्तर प्रदेश के कौशाम्बी जिले के चरवाह गांव के सरपंच श्रीपाल जी ने देखी। उन्होंने तुरंत आश्रम से संपर्क कर बताया कि यह वृद्धजन उनके गांव के निवासी हैं। इसके बाद प्रभुजी के पुत्र राजकुमार सिंह से संपर्क किया गया, जो पिछले दो वर्षों से अपने पिता की हर जगह तलाश कर रहे थे।
जानकारी मिलते ही सरपंच श्रीपाल जी एवं पुत्र राजकुमार सिंह तुरंत अपना घर आश्रम नोखा पहुंचे। वहां उन्होंने अपने पिता श्री रणजीत राम सिंह को पूरी तरह सुरक्षित एवं स्वस्थ देखकर भावुक हो गए। अपने पिता से मिलकर परिवार की आंखों में खुशी के आंसू छलक उठे। इसके बाद वे अपने पिता को सम्मानपूर्वक अपने साथ घर लेकर गए।
परिवारजनों ने आश्रम परिवार का आभार व्यक्त करते हुए कहा— हम पिछले दो वर्षों से अपने पिताजी की तलाश कर रहे थे। आज सोशल मीडिया और अपना घर आश्रम की सेवा भावना के कारण हमें हमारे पिताजी वापस मिल पाए हैं।
आश्रम संरक्षक ओमप्रकाश जी मूंदड़ा एवं सचिव सतीश जी झंवर ने कहा कि मानवता की सेवा ही सर्वोपरि है। यदि सच्चे सेवा भाव और अपनत्व के साथ किसी असहाय प्रभुजी की सेवा की जाए, तो उनका पुनर्वास कोई कठिन कार्य नहीं है।
विशेष उल्लेखनीय :
जनवरी 2026 से अब तक अपना घर आश्रम नोखा द्वारा 36 प्रभुजनों का सफल पुनर्वास कराया जा चुका है। इस अवसर पर सवाई माधोपुर से पधारी हरीनाम संकीर्तन टीम भी इस भावुक पुनर्वास की साक्षी बनी। टीम में रामचरण, सत्यनारायण, वृंदावन जी, बृज बिहारी, गोपाल, राहुल, नरेन्द्र एवं धर्म उपस्थित रहे।
यह घटना इस बात का जीवंत उदाहरण है कि सेवा, संवेदना और सोशल मीडिया के सदुपयोग से बिछड़े परिवारों को पुनः मिलाया जा सकता है।