अघोरी बाबा शैलेंद्र नाथ को मिलेगी मानद डॉक्टरेट की उपाधि

निलेश मुद्गल 

झुंझुनूं (नवयत्न)। पंडित दीनदयाल उपाध्याय शेखावाटी विश्वविद्यालय, सीकर के दीक्षांत समारोह में मुकुंदगढ़ के अघोरी संत बाबा शैलेन्द्र नाथ जी महाराज को डॉक्टरेट की उपाधि से नवाजा जाएगा। विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा तीन विशिष्ट हस्तियों को मानद उपाधि (डॉक्टरेट) प्रदान करने की घोषणा की गई है, जिसमें मुकुंदगढ़ के अघोरी संत शैलेंद्र नाथ महाराज का नाम प्रमुख रूप से शामिल है।

 

एबीवीपी के जिला सयोजक अभयप्रताप सिंह ने बताया कि यह दीक्षांत समारोह 28 मार्च को आयोजित होगा, जिसमें महाराष्ट्र के रामचन्द्र नीलकंठ भोमले, पश्चिम बंगाल के डॉ. धनपत राम अग्रवाल और राजस्थान के अघोरी संत शैलेंद्र नाथ को सम्मानित किया जाएगा।

 

कौन हैं अघोरी बाबा शैलेंद्र नाथ?

एक हाथ में चिलम, दूसरे में डमरू, काले वस्त्र, आखों में लालिमा, गहन साधना का भाव। विस्मय, अचरज, कौतूहल से भरी शख्सियत ये है; मुकुंदगढ़ स्थित कुंभनाथ दरबार ब्रह्म बगीची के महंत शैलेंद्र नाथ अघोरी बाबा एक विशिष्ट आध्यात्मिक व्यक्तित्व माने जाते हैं। वे कामधेनु सेवा संस्थान ट्रस्ट के संस्थापक हैं और मां कामाख्या के उपासक के रूप में जाने जाते हैं। उनकी पहचान उनके पारंपरिक अघोरी स्वरूप से भी जुड़ी है

 

उनके प्रमुख कार्य:

आश्रम में नियमित कन्या पूजन एवं धार्मिक आयोजन, गौशाला संचालन और जनसेवा, जरूरतमंदों के लिए निःशुल्क भोजन व्यवस्था, बड़े धार्मिक आयोजनों के साथ सामाजिक कार्यक्रम; हाल ही में आयोजित महायज्ञ, कबड्डी प्रतियोगिता और चिकित्सा शिविर; उनकी गतिविधियों में धार्मिकता के साथ सामाजिक पहल का मिश्रण देखने को मिलता है, जिससे वे स्थानीय स्तर पर चर्चित हैं।

 

क्यों दिया जा रहा है मानद डॉक्टरेट?

विश्वविद्यालय द्वारा उन्हें यह सम्मान उनके सामाजिक, धार्मिक एवं जनसेवा कार्यों को देखते हुए दिया जा रहा है। हालांकि यह सम्मान पारंपरिक अकादमिक उपलब्धियों के बजाय समाज में योगदान के आधार पर दिया जा रहा है।

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