आर्थिक पैकेज से नहीं बिगड़ेगा बजट

नई दिल्ली,16 मई। देश की इकोनॉमी में ऊर्जा का नया संचार करने के लिए सरकार की तरफ से तीन दिनों में करीब 11 लाख करोड़ रुपये की योजनाओं का एलान किया जा चुका है। लेकिन इसका आम बजट 2020-21 को लेकर सरकार के गणित पर बहुत ज्यादा असर नहीं पड़ेगा। अभी तक की गणना के मुताबिक कोविड- 19 से देश की इकोनोमी को बचाने के लिए जितनी घोषणाएं की गई हैं, उससे आम बजट पर मुश्किल से 1.6 लाख करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। वित्त मंत्री ने कुल 35 घोषणाएं की हैं जिनमें से 11 सिर्फ वित्तीय संसाधन जुटाने से जुड़ी हुई हैं। करीब दर्जनभर योजनाओं को लागू करने की जिम्मेदारी बैंकिंग सेक्टर को निभानी होगी। वित्त मंत्री की ओर से घोषित कम-से-कम 10 योजनाएं ऐसी हैं, जिनके बारे में पहले ही बजट में एलान भी किया गया है और उनके मद में प्रावधान भी है। वित्त मंत्री ने पहले दिन 15 योजनाओं का एलान किया था। इनमें से पांच सुधार संबंधी नीतिगत घोषणाएं थीं, जबकि 10 घोषणाओं के जरिये सीधे या परोक्ष तौर पर वित्तीय राहत देने की बात थी। इन 10 घोषणाओं का कुल वित्तीय आकार 5,94,250 करोड़ रुपये था। इसमें सिर्फ 2,500 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ सरकार को उठाना पड़ेगा, क्योंकि कर्मचारियों व नियोक्ताओं के ईपीएफ में तीन महीने के योगदान के लिए प्रावधान करने होंगे।

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