परंपरा की लौ जलाने में जुटे बनवारीलाल, चाक पर आकार ले रहे मिट्टी के दीए
रामावतार सोनी
बुगाला (नवयत्न)। दीपावली के पर्व को लेकर बाजारों में रौनक बढ़ने लगी है। वहीं गांव के कुम्हार परिवार भी रोशनी के इस पर्व की तैयारियों में जुट गए हैं। गांव के बनवारीलाल कुमावत पारंपरिक तरीके से चाक पर मिट्टी के दीए बनाने में व्यस्त हैं। वे दिनभर मिट्टी को आकार देकर दीए तैयार करते हैं। इसके बाद इन्हें सुखाकर पकाया जाता है, ताकि दीपावली से पहले बिक्री के लिए तैयार किया जा सके। बनवारीलाल का कहना है कि दीपावली के पांच दिवसीय पर्व की शुरुआत के पहले दिन से ही घरों में मिट्टी के दीये जलाने का सिलसिला शुरू हो जाता है, जो दीपावली तक निरंतर जारी रहता है। इतना ही नहीं, दीपावली के बाद भी वर्षभर आने वाले विभिन्न त्योहारों और धार्मिक अवसरों पर मिट्टी के दीयों का उपयोग किया जाता है। आधुनिक दौर में बिजली की झालरों और रंग-बिरंगी लाइटों का चलन भले ही बढ़ा है, लेकिन मिट्टी के दीयों का पारंपरिक महत्व आज भी बरकरार है। घर-आंगन में मिट्टी के दीये जलाने से जहां हमारी परंपरा जीवंत रहती है, वहीं कुम्हार परिवारों को रोजगार भी मिलता है।