बोनस राशि पूरी नकद देने एवं वेतन सीमा में बदलाव की मांग

महेंद्र खडोलिया
श्रीमाधोपुर (नवयत्न)। राजस्थान संस्कृत शिक्षा विभागीय शिक्षक संघ ने राज्य के मुख्यमंत्री एवं प्रमुख शासन सचिव वित्त को पत्र लिखकर शिक्षकों एवं राज्य कर्मचारियों को दिये जाने वाले बोनस की पूरी राशि का भुगतान बैंक खाते में करने एवं सातवें वेतनमान तथा महंगाई के अनुरूप बोनस की गणना के लिए निर्धारित वेतन सीमा में बदलाव की मांग की है। संगठन के प्रदेशाध्यक्ष अशोक तिवाड़ी मऊ ने बताया कि कोविड के दौरान वित्तीय परिस्थितियों को देखते हुए पात्र कार्मिकों को बोनस की 75 प्रतिशत राशि बैंक खाते में एवं 25 प्रतिशत राशि उनके जीपीएफ खाते में जमा करने की व्यवस्था 2022 से लागू हुई। लेकिन कोरोना के बाद भी इस व्यवस्था की समीक्षा नहीं होने से 2025 तक यही व्यवस्था चली आ रही है। वहीं दूसरी ओर बोनस की गणना के लिए निर्धारित वेतन सीमा में सातवें वेतनमान एवं महंगाई के अनुरूप बदलाव नहीं होने से लेवल-12 ग्रेड पे 4800 अराजपत्रित या इससे नीचे के वेतनमान में कार्यरत पात्र नियमित राज्य कर्मचारी ही बोनस के दायरे में आते हैं। बहुत से शिक्षकों व राज्य कर्मचारियों को बोनस का लाभ नहीं मिल पा रहा है। तिवाड़ी ने यह भी बताया कि संगठन ने पत्र के माध्यम से सरकार को इस गम्भीर विषय पर संज्ञान लेकर 2026 के तदर्थ बोनस राशि का पूरा भुगतान कार्मिकों के बैंक खातों में जमा करने एवं बोनस गणना के लिए निर्धारित वेतन सीमा में भी सातवें वेतनमान तथा महंगाई के अनुरूप बदलाव करवाकर शिक्षकों एवं राज्य कर्मचारियों को लाभान्वित करने का निवेदन किया है। संघ के प्रदेश महामंत्री दयाल सिंह काजला ने बताया कि दीपावली अतिरिक्त राशि की आवश्यकता होती है। ऐसे में पूरी बोनस राशि का नकदी खाते में मिलने होने से व बोनस गणना में बदलाव किये जाने से शिक्षकों एवं राज्य कर्मचारियों को राहत मिल सकती है।

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