बीदासर में फिर अटका बहुमत का गणित, 6 निर्दलीयों के हाथ पालिकाध्यक्ष की चाबी
निसं
बीदासर (नवयत्न)। गरपालिका बीदासर के 35 वार्डों के लिए हुए चुनाव की मतगणना सोमवार को नोखा-सीकर रोड स्थित ज्ञान ज्योति शिक्षण संस्थान उच्च माध्यमिक विद्यालय में शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुई। मतगणना के बाद सामने आए परिणामों ने बीदासर की राजनीति में एक बार फिर वर्ष 2021 की चुनावी तस्वीर को दोहरा दिया। इस बार भी भाजपा ने 16 वार्डों में जीत दर्ज की, कांग्रेस ने 13 सीटों पर कब्जा जमाया, जबकि 6 निर्दलीय प्रत्याशियों ने जीत हासिल कर दोनों प्रमुख दलों के सामने बोर्ड गठन का गणित उलझा दिया। 35 सदस्यीय नगरपालिका में बहुमत के लिए 18 पार्षदों का समर्थन आवश्यक है। ऐसे में भाजपा 16 सीटों के साथ सबसे बड़े दल के रूप में उभरी है, लेकिन बहुमत के आंकड़े से दो कदम दूर है। कांग्रेस के पास 13 सीटें हैं और उसे बहुमत के लिए पांच पार्षदों की जरूरत होगी। दूसरी ओर छह निर्दलीय पार्षदों के पास अब सत्ता की चाबी पहुंच गई है। यही कारण है कि मतगणना समाप्त होते ही बीदासर की राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र निर्दलीय विजेता बन गए हैं।
भाजपा सबसे बड़े दल के रूप में उभरी
चुनाव परिणाम सामने आने के बाद भाजपा खेमे में उत्साह का माहौल दिखाई दिया। 16 वार्डों में जीत के साथ भाजपा सबसे बड़े दल के रूप में सामने आई है। पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने जीत का जश्न मनाते हुए आतिशबाजी की तथा एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर खुशी जाहिर की। हालांकि भाजपा बहुमत से दो सीट दूर है, इसलिए पार्टी के सामने अब निर्दलीय पार्षदों को अपने पक्ष में लाने की चुनौती है। यदि भाजपा को दो निर्दलीय पार्षदों का समर्थन मिल जाता है तो वह बहुमत के आंकड़े तक पहुंच सकती है।
कांग्रेस के सामने भी बोर्ड बनाने की चुनौती
कांग्रेस ने 13 वार्डों में जीत हासिल की है। परिणाम आने के बाद कांग्रेस खेमे में अपेक्षाकृत मायूसी जरूर नजर आई, लेकिन बोर्ड गठन के लिहाज से पार्टी की संभावनाएं पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं। कांग्रेस को बहुमत के लिए पांच पार्षदों के समर्थन की जरूरत है। ऐसे में कांग्रेस भी छह निर्दलीय पार्षदों के संपर्क में रहने और उन्हें अपने पक्ष में करने की रणनीति पर काम कर सकती है। आने वाले दिनों में दोनों दलों के बीच निर्दलीय पार्षदों को लेकर राजनीतिक जोड़-तोड़ तेज होने की संभावना है।
निर्दलीय पार्षद बने सत्ता की धुरी
बीदासर चुनाव का सबसे महत्वपूर्ण पहलू छह निर्दलीय प्रत्याशियों की जीत है। किसी भी प्रमुख दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलने के कारण इन छह पार्षदों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो गई है। भाजपा को बहुमत तक पहुंचने के लिए कम से कम दो निर्दलीयों की जरूरत है, जबकि कांग्रेस को पांच निर्दलीय पार्षदों का समर्थन चाहिए। ऐसे में निर्दलीय पार्षदों के पास दोनों दलों के सामने अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत करने का अवसर है। पालिका अध्यक्ष के चुनाव से पहले किस दल के साथ कितने निर्दलीय जाते हैं, यही बीदासर के अगले राजनीतिक समीकरण को तय करेगा।
पांच साल बाद फिर दोहराया 2021 का गणित
नगरपालिका चुनाव की सबसे दिलचस्प बात यह रही कि पांच साल बाद चुनाव परिणाम लगभग वर्ष 2021 की तस्वीर की हूबहू पुनरावृत्ति करते नजर आए।
वर्ष 2021 : भाजपा -16 सीट, कांग्रेस -13 सीट, निर्दलीय -6 सीट
वर्ष 2026 : भाजपा -16 सीट, कांग्रेस -13 सीट, निर्दलीय -6 सीट
यानी पांच साल बाद भी तीनों खेमों के सीटों का आंकड़ा बिल्कुल समान रहा। इससे यह चुनाव परिणाम बीदासर की स्थानीय राजनीति में खास चर्चा का विषय बन गया है। मतदाताओं ने एक बार फिर ऐसा जनादेश दिया है, जिसमें किसी एक दल को पूर्ण बहुमत नहीं मिला और सत्ता की चाबी निर्दलीयों के हाथ में चली गई।
चर्चित वार्ड 8 और 9 में देवरानी-जेठानी की हार
बीदासर चुनाव में वार्ड नंबर 8 और 9 के परिणाम भी खासे चर्चित रहे। दोनों वार्डों में भाजपा के टिकट पर देवरानी-जेठानी चुनाव मैदान में थी। चुनाव प्रचार के दौरान इन वार्डों पर राजनीतिक गतिविधियां भी तेज रही थी। भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र सिंह राठौड़ ने भी इनके समर्थन में चुनावी सभा कर प्रचार किया था। इसके बावजूद दोनों प्रत्याशियों को चुनाव में हार का सामना करना पड़ा। परिणाम सामने आने के बाद वार्ड 8 और 9 का चुनावी परिणाम राजनीतिक गलियारों के साथ-साथ सोशल मीडिया और आमजन के बीच भी चर्चा का विषय बना हुआ है।
कहीं पांच मतों से जीत तो कहीं 393 मतों का अंतर
चुनाव परिणामों में कई वार्डों में बेहद करीबी मुकाबला देखने को मिला। वार्ड नंबर 31 में कांग्रेस प्रत्याशी लक्ष्मी रेगर ने महज पांच मतों के अंतर से जीत दर्ज की। इतने कम अंतर से आया परिणाम पूरे चुनाव में चर्चा का विषय बना रहा। वहीं दूसरी ओर वार्ड नंबर 25 में कांग्रेस प्रत्याशी फरजाना ने 393 मतों के बड़े अंतर से जीत दर्ज की। इससे साफ है कि अलग-अलग वार्डों में मतदाताओं का रुझान और मुकाबले का स्वरूप पूरी तरह अलग रहा।
मतगणना स्थल पर जीत के बाद पहुंचे प्रत्याशी
मतगणना के दौरान भाजपा और कांग्रेस के अधिकांश प्रत्याशी मतगणना स्थल पर नजर नहीं आए। जैसे-जैसे अलग-अलग वार्डों के परिणाम घोषित होते गए, जीतने वाले प्रत्याशी मतगणना स्थल पर पहुंचते रहे। निर्वाचन अधिकारी एवं एसडीएम अम्मीलाल यादव ने विजेता प्रत्याशियों को जीत के प्रमाण पत्र प्रदान किए। प्रमाण पत्र मिलने के बाद विजेता प्रत्याशियों के समर्थकों में उत्साह देखने को मिला। कई स्थानों पर समर्थकों ने आतिशबाजी की और विजयी प्रत्याशियों को मिठाई खिलाकर बधाई दी।
जीत के बाद शुरू हुई बाड़ाबंदी
परिणाम घोषित होने के साथ ही राजनीतिक गतिविधियों ने नया मोड़ ले लिया। विजेता पार्षदों के प्रमाण पत्र लेने के बाद भाजपा और कांग्रेस के पार्षदों की बाड़ाबंदी की चर्चाएं तेज हो गई। दोनों प्रमुख दल अपने-अपने पार्षदों को एकजुट रखने के साथ-साथ निर्दलीय पार्षदों को अपने खेमे में लाने की कोशिश में जुटे हैं। पालिका अध्यक्ष के चुनाव तक राजनीतिक समीकरणों में कई बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
21 सितंबर को होगा पालिकाध्यक्ष का फैसला
अब बीदासर की राजनीति की सबसे बड़ी तस्वीर 21 सितंबर को सामने आएगी, जब नगरपालिका अध्यक्ष का चुनाव होगा। 35 सदस्यीय बोर्ड में भाजपा के 16, कांग्रेस के 13 और निर्दलीयों के 6 पार्षद हैं। बहुमत के लिए 18 पार्षदों का समर्थन आवश्यक होगा। ऐसे में भाजपा को अध्यक्ष पद हासिल करने के लिए कम से कम दो अतिरिक्त पार्षदों के समर्थन की जरूरत होगी, जबकि कांग्रेस को पांच पार्षदों का समर्थन जुटाना होगा। यही वजह है कि फिलहाल दोनों दलों की निगाहें छह निर्दलीय पार्षदों पर टिकी हुई हैं।
किसके सिर सजेगा अध्यक्ष का ताज ?
चुनाव परिणाम ने बीदासर में अध्यक्ष पद की तस्वीर को पूरी तरह रोचक बना दिया है। भाजपा संख्या बल के लिहाज से सबसे बड़ी पार्टी है, लेकिन बहुमत से दूर है। कांग्रेस भी मुकाबले में है और निर्दलीयों के समर्थन से सत्ता का गणित बदल सकती है। अब देखना यह होगा कि छह निर्दलीय पार्षद किस दल का साथ देते हैं या कोई अलग राजनीतिक रणनीति सामने आती है। यदि निर्दलीयों का समर्थन किसी एक दल को मिलता है तो पालिका बोर्ड का गठन उसी दिशा में तय हो सकता है। इस पूरे घटनाक्रम में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निर्दलीय पार्षदों की रहने वाली है। यही छह पार्षद बीदासर नगरपालिका की सत्ता का रुख तय कर सकते हैं।