श्री गोपाल गौपुष्टि महायज्ञ के चौथे दिन 16 लाख 11 हजार आहुतियां लगी

महेंद्र खडोलिया
श्रीमाधोपुर (नवयत्न)। कालाकोटा दाऊधाम में परमपूज्य अनंत विभूषित श्रीमद् जगतगुरु बाहुबल द्वाराचार्य पीठाधीश्वर बलदेवाचार्य महाराज के सान्निध्य में 19 मार्च से चल रहे 9 दिवसीय 108 कुण्डीय श्री गोपाल गौपुष्टि महायज्ञ के चौथे दिन रविवार तक कुल 16 लाख 11 हजार आहुतियां लग चुकी है। यज्ञाचार्य पण्डित चिरंजीवी शास्त्री के आचार्यत्व में यजमान जोड़ों द्वारा यह आहुतियां लगाई गई हैं।

इस मौके पर दाऊधाम कालाकोटा में आए श्रद्धालुओं ने यज्ञ भगवान की परिक्रमा लगाकर सुख समृद्धि और खुशहाली की कामना की। प्रधान कुंड पर संत बलदेवाचार्य महाराज, विनोद दास महाराज, भोलाशंकर दास महाराज, गिरधरदास महाराज ने आहुतियां दी। महायज्ञ के मौके पर हवामहल , जयपुर के विधायक बालमुकुंदाचार्य महाराज भी पंहुचने और यज्ञ में आहुतियां दी। उन्होंने गौमाता एवं पूरे भारतवर्ष के लोगों की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना करते हुए यज्ञ के महत्व को बताया। उन्होंने कहा कि जहां यज्ञ होता है वहां वर्षा अच्छी होती है और वहां का वातावरण भी शुद्ध हो जाता है।

हर सनातनी को यज्ञ में बैठना चाहिए, गौमाता की सेवा करनी चाहिए। विधायक बालमुकुंदाचार्य महाराज ने ठाकुर जी महाराज के दर्शन किए एवं यज्ञशाला की परिक्रमा लगाई।संत बलदेवाचार्य महाराज ने माला पहनाकर एवं शॉल ओढ़ाकर बालमुकुंदाचार्य महाराज का स्वागत अभिनन्दन सम्मान किया। संत बलदेवाचार्य महाराज द्वारा विधायक बालमुकुंदाचार्य महाराज को मातारानी जगदम्बा भवानी के चल रहे नवरात्रों को लेकर माता की चूनरी भी भेंट की गई और उन्हें दाऊधाम की नंदीशाला का भ्रमण कराया।

विधायक बालमुकुंदाचार्य महाराज ने गौ संरक्षण को लेकर भी विशेष जोर दिया । विधायक ने दाऊधाम में नंदी शाला के विस्तार की आवश्यकता बताते हुए यहां हजारों गायों एवं नंदियों के संरक्षण के लिए बड़ी गौशाला विकसित किए जाने पर विशेष जोर दिया । उन्होंने बताया कि संतों , श्रद्धालुओं और सरकार के सहयोग से इस दिशा में कार्य किया जा रहा है । भविष्य में लगभग 100 बीघा भूमि पर विशाल नंदीशाला बनाने का संकल्प लिया गया है । उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ,संत समाज और आमजन मिलकर गौमाता और नंदी महाराज की रक्षा के लिए कार्य कर रहे हैं, और इस महायज्ञ के माध्यम से भी यही संकल्प लिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि “यज्ञ हमारी वेद परम्परा का सबसे श्रेष्ठ कर्म “जिसमें सबको शामिल होना चाहिए।

भक्तगणों, श्रृद्धालुगणों, ग्रामीणजनों , संत महात्माओं, जनप्रतिनिधियों, मीडियाकर्मियों की बड़ी संख्या में उपस्थिति देखी गई। दोनों समय पंगत प्रसादी ग्रहण करने वालों की भीड़ रही। रासलीला, रामलीला और श्रीमद्भागवत कथा सुनने देखने वालों की धार्मिक आस्था और श्रद्धा भाव सराहनीय रहा। कार्यकर्ताओं का उत्साह और उमंग काबिले तारीफ रहा जो भाग भागकर हर काम निपटाने में जुटे दिखाई दिए। संत-महात्माओं के आशीर्वचनों से भी श्रद्धालु लाभान्वित हुए। चिकित्सा शिविर में मरीज उपचार कराते दिखाई दिए वहीं श्रद्धालुओं ने ठाकुरजी महाराज एवं नंदी शाला के भी दर्शनों का लाभ उठाया।

You might also like