ईडब्ल्यूएस सर्टिफिकेट पर राजस्थान हाईकोर्ट का फैसला
दर्शील शर्मा
झुंझुनू (नवयत्न)। राजस्थान हाईकोर्ट ने संविदा नर्स ग्रेड-2 भर्ती में ईडब्ल्यूएस श्रेणी का लाभ नहीं मिलने से बाहर हुई महिला अभ्यर्थी को राहत दी है। हाईकोर्ट ने कहा कि सिर्फ इस आधार पर किसी उम्मीदवार को ईडब्ल्यूएस के लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता कि उसका ईडब्ल्यूएस सर्टिफिकेट आवेदन की आखिरी तारीख के बाद जारी हुआ था, खासकर जब सरकारी नियम बाद में सर्टिफिकेट और एफिडेविट जमा करने की अनुमति देते हों। जस्टिस कुलदीप माथुर ने माना कि याचिकाकर्ता कटऑफ तारीख पर ईडब्ल्यूएस श्रेणी में थी और संबंधित सरकारी नियमों के तहत बाद में सर्टिफिकेट जमा करने की व्यवस्था भी थी। इसी आधार पर कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को याचिकाकर्ता की ईडब्ल्यूएस श्रेणी में उम्मीदवारी पर दोबारा विचार करने और नियमों के मुताबिक आगे की प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए हैं।
शादी के बाद हरियाणा से राजस्थान आई थी महिला
याचिकाकर्ता सुशीला मूल रूप से हरियाणा की रहने वाली हैं और शादी के बाद राजस्थान आई थीं। उनके परिवार की आय निर्धारित सीमा के भीतर है, इसलिए वह ईडब्ल्यूएस श्रेणी की पात्र हैं। राज्य सरकार की ओर से 28 जनवरी 2025 को संविदा नर्स ग्रेड-2 के पदों पर भर्ती का विज्ञापन जारी किया गया था। सुशीला ने भी इस भर्ती के लिए आवेदन किया था लेकिन आवेदन के समय वह ईडब्ल्यूएस सर्टिफिकेट उपलब्ध नहीं करा सकी थी। इसके चलते उन्हें अनरिजर्व्ड यानी सामान्य श्रेणी में आवेदन करना पड़ा। बाद में उन्होंने अपनी श्रेणी ईडब्ल्यूएस में बदलने के लिए अधिकारियों को आवेदन दिया।
कटऑफ से ज्यादा अंक फिर भी भर्ती से बाहर किया
भर्ती प्रक्रिया में सुशीला के अंक ईडब्ल्यूएस-फिमेल श्रेणी की कट ऑफ से ज्यादा थे। इसके बावजूद उन्हें ईडब्ल्यूएस श्रेणी में डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के लिए नहीं बुलाया गया। उन्होंने अधिकारियों के सामने आपत्ति जताई और ईडब्ल्यूएस श्रेणी में अपनी उम्मीदवारी पर विचार करने की मांग की। इसके बावजूद उनकी उम्मीदवारी स्वीकार नहीं की गई। बाद में उनका अभ्यावेदन भी खारिज कर दिया गया। इसके खिलाफ उन्होंने राजस्थान हाईकोर्ट का रुख किया।
सरकारी सर्कुलर में बाद में सर्टिफिकेट देने की थी व्यवस्था
हाईकोर्ट ने मामले में 17 अक्टूबर 2022 के सरकारी सर्कुलर को देखा। इसमें आरक्षित श्रेणी का लाभ लेने के लिए सामान्य तौर पर आवेदन की आखिरी तारीख से पहले संबंधित सर्टिफिकेट होने की बात कही गई थी लेकिन इसी नियम में एक प्रावधान भी था। अगर किसी कारण से अभ्यर्थी आखिरी तारीख तक सर्टिफिकेट जमा नहीं कर पाता है तो वह बाद में सर्टिफिकेट दे सकता है। इसके साथ अभ्यर्थी को एक एफिडेविट देना होगा कि आवेदन की आखिरी तारीख पर वह संबंधित श्रेणी के लिए पात्र था। अगर बाद में यह जानकारी गलत पाई जाती है तो उसकी नियुक्ति रद्द की जा सकती है। हाईकोर्ट ने यह भी देखा कि भर्ती के विज्ञापन में इसी सरकारी सर्कुलर के तहत ईडब्ल्यूएस समेत आरक्षित श्रेणी के अभ्यर्थियों को सर्टिफिकेट और एफिडेविट जमा करने की व्यवस्था का जिक्र किया गया था।
उम्मीदवारों को कैटेगरी बदलने का मौका भी मिला था
हाईकोर्ट ने इस मामले में 12 सितंबर 2023 के एक दूसरे सर्कुलर का भी जिक्र किया। इसमें उम्मीदवारों को ऑनलाइन आवेदन में कुछ जानकारियां बदलने की सुविधा दी गई थी। इसमें अपनी कैटेगरी बदलने का विकल्प भी शामिल था। सुशीला ने इसी व्यवस्था के तहत सामान्य से ईडब्ल्यूएस श्रेणी में अपनी कैटेगरी बदलने का अनुरोध किया था। कोर्ट ने भी माना कि उन्होंने यह अनुरोध उसी अवधि में किया था, जब उम्मीदवारों को ऑनलाइन आवेदन में बदलाव करने का मौका दिया गया था। हाईकोर्ट ने यह भी नोट किया कि सुशीला की इस मांग पर कोई स्पष्ट आदेश नहीं दिया गया था। बाद में उनकी उम्मीदवारी यह कहते हुए खारिज कर दी गई कि उन्होंने शुरुआत में सामान्य श्रेणी में आवेदन किया था।
हाईकोर्ट ने पुराने फैसले को इस मामले में अलग माना
हाईकोर्ट ने देखा कि याचिकाकर्ता की उम्मीदवारी खारिज करने के लिए अधिकारियों ने सोनल त्यागी बनाम राजस्थान सरकार मामले के फैसले का भी हवाला दिया था लेकिन हाईकोर्ट ने कहा कि उस मामले में उम्मीदवारों को ऑनलाइन आवेदन के बाद अपनी कैटेगरी बदलने का मौका नहीं दिया गया था। इसलिए वहां आवेदन की आखिरी तारीख से जुड़े नियम को सख्ती से लागू किया गया था लेकिन सुशीला के मामले में स्थिति अलग थी। यहां अधिकारियों ने खुद उम्मीदवारों को आवेदन के बाद कैटेगरी बदलने का मौका दिया था। इसलिए हाईकोर्ट ने कहा कि सोनल त्यागी के फैसले को इस मामले में भी उसी तरह लागू नहीं किया जा सकता।
शादी के बाद राजस्थान आने से ईडब्ल्यूएस लाभ नहीं छिनेगा
मामले में एक सवाल यह भी था कि सुशीला मूल रूप से हरियाणा की रहने वाली हैं और शादी के बाद राजस्थान आई हैं। क्या इस वजह से वह राजस्थान में ईडब्ल्यूएस का लाभ नहीं ले सकती ? हाईकोर्ट ने इस आपत्ति को भी खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि शादी के बाद हरियाणा से राजस्थान आने की वजह से सुशीला को राजस्थान में जारी ईडब्ल्यूएस सर्टिफिकेट का लाभ लेने से अयोग्य नहीं माना जा सकता। हाईकोर्ट ने इस संबंध में अपने एक पुराने फैसले का भी हवाला दिया। उसमें शादी के बाद राजस्थान आई महिला को नियमों के तहत ईडब्ल्यूएस सर्टिफिकेट का लाभ देने की बात कही गई थी। उस फैसले में कोर्ट ने यह भी कहा था कि राज्य में पात्र महिलाओं को ईडब्ल्यूएस सर्टिफिकेट जारी किया जा सकता है।
ईडब्ल्यूएस में उम्मीदवारी पर दोबारा विचार के दिए निर्देश
सभी पहलुओं को देखते हुए जस्टिस कुलदीप माथुर ने सुशीला की याचिका मंजूर कर ली। कोर्ट ने निर्देश दिया कि उनकी उम्मीदवारी पर 17 अक्टूबर 2022 के सर्कुलर के अनुसार ईडब्ल्यूएस श्रेणी में दोबारा विचार किया जाए इसके लिए सुशीला से एफिडेविट या अंडरटेकिंग लिया जाएगा कि भर्ती की कटऑफ तारीख पर वह ईडब्ल्यूएस श्रेणी में थी। अगर बाद में यह जानकारी गलत पाई जाती है, तो उन्हें उसके परिणाम भुगतने होंगे। हाईकोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को यह प्रक्रिया 30 दिन के भीतर पूरी करने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए सुशीला को हाईकोर्ट के ऑर्डर की कॉपी लेकर संबंधित अधिकारियों से संपर्क करना होगा।