न्यायाधीशों के आवास व दर्जनभर कार्यालयों का रास्ता फिर भी सड़क पर जानलेवा गड्ढे

एक तरफ हाहाकार दूसरी ओर व्यर्थ बहता पानी नगर परिषद व जलदाय विभाग बना मूकदर्शक

झुंझुनूं,(जय जांगिड़)30 मई। कलेक्ट्रेट सर्किल से महज 400 मीटर की दूरी पर स्थित यह जानलेवा गड्ढे शहर के मंडावा व चूरु जाने वाले रोड पर बने हुए है। सड़क के बीचों-बीच बने इन गड्ढों से कई दफा वाहन चालक घायल हो चुके हैं लेकिन लॉक डाउन के बहाने से जन सुविधाओं से मुंह मोड़ना आम बात हो गई है अधिकारियों की। उक्त गड्ढे लॉक डाउन से पूर्व ही स्थापित हो गए थे, लेकिन प्रशासनिक उदासीनता के चलते इन्हें गत दो माह में भी ठीक नहीं किया जा सका है।

पाइप लाइन लीकेज से बने गढ्ढे
नौतपा की तेज गर्मी व चिलचिलाती धूप में जहां हररोज जिला प्रशासन को पानी की आपूर्ति दुरुस्ती के लिए शहर की जनता द्वारा ज्ञापन दिए जा रहे है, आम जनता हाहाकार कर रही हैं। वहीं इसी मार्ग पर मंडावा मोड़ पुलिस चौकी के सामने सड़क पर व्यर्थ बहते पानी को रोकने की कोई कवायद नहीं किया जाना जलदाय विभाग द्वारा घोर लापरवाही है। सड़क पर बने गड्ढों का मुख्य कारण भी पानी की पाइप लाइन लीकेज होना ही है। पानी की लीकेज से यह गड्डा अपना आकर विस्तृत रूप धारण करते जा रहा है।

व्यस्त मार्ग होने से वाहनों का रहता है रेलम पेल
लॉक डाउन तृतीय चरण तक तो वाहनों का व राहगीरों का आवागमन बहुत कम था लेकिन लॉक डाउन चतुर्थ चरण में मिली छूट के कारण दिनभर राहगीरों व वाहनों का रेलम पेल लगा रहता है। शहर के अति व्यस्त मार्ग मंडावा मोड़ को जाने वाली रोड पर दिन भर जहां आमजन का आवागमन रहता है वहीं दुपहिया वाहन चालकों का यहां से तेज रफ्तार पर वाहन दौड़ाते हुए निकलना किसी भी समय देखा जा सकता है। ऐसे में सड़क के बीचों-बीच बने यह गड्ढे दुपहिया वाहन चालकों के लिए किसी आफत से कम नहीं है। वहीं वाहन चालक की इन गड्ढों से बचकर चलने की कोशिश में राहगीरों को भी दुर्घटना का शिकार कभी भी होना पड़ सकता है।

अधिकारी व कर्मचारी बन रहे मूकदर्शक
आमजन शायद यह सोचकर ही इन गड्ढों की शिकायत नहीं कर रहे हैं कि जब यहां से न्यायाधीशों व महिला अधिकारिता विभाग, वाणिज्यक कर विभाग, एडीआर भवन, आबकारी, आयुर्वेद, रजिस्ट्रार कार्यालय, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग सहित दर्जनभर सरकारी कार्यालय के अधिकारियों और कर्मचारियों का प्रतिदिन आवागमन होता है जब उन्हें ही कहीं कुछ दिखाई नहीं देता तो आमजन की फरियाद क्या मायने रखती है। या फिर प्रशासनिक विभाग को इंतजार है किसी बड़े सड़क हादसे का।

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