अखिल भारतीय कुलगुरु सम्मान समारोह में जुटे देशभर के विद्वान
अबूबकर बल्खी
लाडनू (नवयत्न)। तहसील के जसवंतगढ़ में अखिल भारतीय कुल गुरु सम्मान समारोह का भव्य आयोजन किया गया। यह समारोह समाजसेवी महावीर प्रसाद तापड़िया के 90वें जन्म दिवस के उपलक्ष्य में संपन्न हुआ। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित यज्ञ सम्राट प्रखर जी महाराज ने समाज को अपना पावन आशीर्वाद प्रदान किया। कार्यक्रम में काशी हिंदू विश्वविद्यालय वाराणसी, लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय नई दिल्ली, केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय अजमेर, जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय जोधपुर, महर्षि पाणिनि संस्कृत एवं वैदिक विश्वविद्यालय उज्जैन, तथा उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति सम्मिलित हुए। अपने 90वें जन्म दिवस पर समारोह को संबोधित करते हुए महावीर प्रसाद तापड़िया ने संस्थान के गौरवशाली इतिहास को साझा करते हुए कहा हमारे पूज्य पिताजी ने इस संस्था की स्थापना की थी। उस समय पिताजी का मुख्य लक्ष्य और संकल्प यह था कि यहाँ से अच्छे विद्वान तैयार हो सकें और देश के लिए संस्कारवान नागरिक तैयार हो सकें। इस अवसर पर तापड़िया परिवार के वरिष्ठ सदस्य विजय कुमार तापड़िया और शिवरतन तापड़िया भी मंच पर उपस्थित रहे। कार्यक्रम स्थल पर एक भव्य पांडुलिपि प्रदर्शनी भी लगाई गई, जो सभी के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र रही। यह प्रदर्शनी ज्ञान भारतम परियोजना के तहत लगाई गई। समारोह में प्रखर जी महाराज ने सनातन संस्कृति और आधुनिक शिक्षा के समन्वय पर बल देते हुए राष्ट्र निर्माण में शिक्षकों और तापड़िया परिवार के सामाजिक अवदान की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि बेशक विपक्ष मजबूत होना चाहिए विरोध करना जरूरी है। मगर छात्रों को कॉकरोच की तरह उद्दंड नहीं होना चाहिए। उन्होंने फ्रांस का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत के युवा जिस दिशा में जा रहे है इसपर चिंता व्यक्त की। उन्होंने वर्तमान आधुनिक समय में जसवंतगढ़ में संस्कृत की शिक्षा देना समय की आवश्यकता बताई। इसके साथ ही विश्व में वर्तमान की भयावह स्थिति से देश को बचाने के लिए आपसी प्रेम और एकजुटता को बढ़ाने का आह्वान किया। कार्यक्रम की सफलता में फाउंडेशन के मुख्य समन्वयक श्याम बाबू शर्मा आईटीआई के प्राचार्य श्याम सुंदर शर्मा एवं आईटीआई की उप आचार्य सुरेश कुमार शर्मा, डॉक्टर हेमंत कृष्णा मिश्र आदि का सराहनीय सहयोग रहा।