कांग्रेस को झटका : निवर्तमान पार्षद मेघवाल समर्थकों सहित भाजपा में शामिल
निसं
बीदासर (नवयत्न)। नगर निकाय चुनाव से पहले बीदासर की स्थानीय राजनीति में सियासी हलचल तेज हो गई है। चुनावी तैयारियों के बीच कांग्रेस को उस समय बड़ा झटका लगा, जब कांग्रेस के निवर्तमान पार्षद एवं तीन बार पार्षद रह चुके पन्नालाल मेघवाल ने अपने समर्थकों के साथ कांग्रेस का साथ छोडक़र भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया। भाजपा महामंत्री गोपाल प्रजापत ने बताया कि पन्नालाल मेघवाल के भाजपा में शामिल होने के अवसर पर पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र सिंह राठौड़ ने उन्हें भाजपा का दुपट्टा पहनाकर पार्टी में स्वागत किया। इस दौरान मेघवाल ने भाजपा की विचारधारा के अनुरूप पार्टी के साथ मिलकर कार्य करने तथा संगठन को मजबूत बनाने में सहयोग देने की बात कही।
तीन बार पार्षद रह चुके हैं मेघवाल
पन्नालाल मेघवाल का स्थानीय निकाय की राजनीति में लंबा अनुभव रहा है। वे तीन बार पार्षद रह चुके हैं और वर्तमान में भी निवर्तमान पार्षद हैं। ऐसे में चुनाव से ठीक पहले उनका भाजपा में शामिल होना स्थानीय राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मेघवाल के साथ उनके समर्थकों के भाजपा में आने से पार्टी को आगामी नगर निकाय चुनाव में राजनीतिक रूप से मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
समर्थकों के साथ भाजपा में शामिल
भाजपा में शामिल होने के दौरान पूर्व पार्षद घासीराम मेघवाल, बालाराम, गिरधारीलाल मेघवाल सहित अन्य समर्थक मौजूद रहे। पार्टी पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं ने मेघवाल और उनके समर्थकों का स्वागत किया तथा आगामी चुनाव में संगठन को मजबूत करने के लिए एकजुट होकर कार्य करने का आह्वान किया।
चुनाव से पहले बढ़ी राजनीतिक सरगर्मी
नगर निकाय चुनाव की तैयारियों के बीच एक प्रमुख स्थानीय जनप्रतिनिधि का दल बदलना बीदासर की राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है। पन्नालाल मेघवाल के भाजपा में शामिल होने से कांग्रेस और भाजपा दोनों के स्थानीय राजनीतिक समीकरणों पर इसका असर पडऩे की संभावना है। आने वाले दिनों में चुनावी मैदान में इसका कितना प्रभाव दिखाई देता है, यह देखने वाली बात होगी। राजनीतिक जानकारों की नजर अब इस बात पर है कि मेघवाल के भाजपा में शामिल होने के बाद उनके समर्थकों की सक्रियता किस तरह रहती है और आगामी नगर निकाय चुनाव में पार्टी को इसका कितना लाभ मिलता है। वहीं, कांग्रेस के लिए चुनाव से पहले अपने स्थानीय संगठन और पार्षदों को एकजुट रखना महत्वपूर्ण चुनौती माना जा रहा है।