श्रीकृष्ण का चरित्र सबके मन में चलने वाली अबाध प्रक्रिया- तिवाड़ी
बृजेन्द्र सिंह लमोरिया
चिड़ावा (नवयत्न) । मर्यादा पुरूषोतम भगवान श्रीराम का चरित्र हर युग में प्राणी मात्र के लिए आदर्श चरित्र है। जबकि भगवान श्रीकृष्ण का चरित्र सबके मन में चलने वाली अबाध प्रक्रिया है। भागवत में जो कंस है वह हमारे मन के अंदर बैठा अभिमान है। जब अभिमान रूपी कंस मन पर अधिकार कर लेता है तो उसके अनुचर काम, क्रोध, मद, लोभ, मान, मोह अपने आप आ जाते हैं जिन्हें भागवत में पूतना, कालिया, बकासुर, अघासुर आदि नाम से बताया गया है। उक्त आध्यात्मिक विवेचना वाणी भूषण पंडित प्रभुशरण तिवाड़ी ने सेही कलां के नेत दादा मंदिर परिसर में पवित्र पुरुषोत्तम मास के अवसर पर चल रही श्रीमद् भागवत कथा के पंचम दिवस कृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन करते हुए व्यक्त की। कथा में पूतना वध, कालिया दहन, बकासुर, अघासुर आदि दैत्य वध तथा गोवर्धन धारण की लीला का विस्तार से वर्णन किया गया। इस अवसर पर कथा में कृष्ण बाल लीला तथा गोवर्धन धारण की सजीव झांकी सजाई गई। कथा के दौरान सुन्दर भजनों की मनोहारी प्रस्तुति ने सभी को आनंदित किया। कथा के प्रारंभ में यजमान विक्रम शर्मा ने वैदिक मंत्रोच्चार के मध्य भागवत व व्यास पूजन किया। इस दौरान डॉ जगदीश प्रसाद शर्मा, पूर्व सरपंच शीशराम गोस्वामी, हजारीलाल शर्मा, बुद्धिधर कुलहरी, भागीरथ जांगिड, राकेश पूनिया, प्रवीण शर्मा, राजेंद्र सिंह शेखावत, मातुराम महरिया, संजय भगत, नत्थुराम शर्मा, जितेंद्र जांगिड़, ब्रह्मानंद पूनिया, रतनलाल शर्मा, पवन शर्मा योगेश जांगिड़, निशांत जांगिड, अरविन्द शर्मा, संजय भगत, सीताराम शर्मा, अशोक शर्मा, संतोष सिंह शेखावत, ओमप्रकाश महरिया, विक्रम शर्मा, करनसिंह शेखावत, सत्यनारायण कुमावत, प्रमोद भगत, होशियारी लाल शर्मा, गजाननंद शर्मा, अनिल शर्मा, धरम सिंह शेखावत, रवि कुमावत सहित काफी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।