सफेद कोट में बेटियों का बढ़ता दबदबा, मेडिकल कॉलेज के आंकड़ों ने दिखाई बराबरी की तस्वीर

नवरतन वर्मा
चूरू (नवयत्न) । रूढ़ियां टूट रही , सपने हो रहे साकार, चूरू मेडिकल कॉलेज में बेटियां बनीं आधी डॉक्टर शक्ति। जी हां चिकित्सा जैसे चुनौतीपूर्ण और जिम्मेदारी भरे क्षेत्र में बेटियां अब बेटों के बराबर मजबूती से खड़ी नजर आ रही हैं। चूरू के राजकीय मेडिकल कॉलेज के पिछले वर्षों के आंकड़े इस बदलाव की गवाही दे रहे हैं। वर्ष 2018 से 2025 तक कॉलेज में एमबीबीएस के लिए प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों में लगभग 50 प्रतिशत छात्राएं रही हैं, जबकि डॉक्टर बनकर निकलने वालों में भी बेटियों की भागीदारी लगभग बराबर रही है।
राजकीय मेडिकल कॉलेज की स्थापना वर्ष 2018 में हुई थी। शुरुआत में यहां 100 सीटों पर प्रवेश दिया गया था। इसके बाद सीटों की संख्या बढ़ाकर 150 कर दी गई और वर्ष 2019 से लगातार 150 सीटों पर प्रवेश हो रहा है। वर्ष 2018 से 2025 तक कुल 1150 विद्यार्थियों ने कॉलेज में प्रवेश लिया, जिनमें 625 छात्र और 524 छात्राएं शामिल रहीं।
छात्राओं की बढ़ी भागीदारी
प्रवेश के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2021 और 2022 में छात्राओं की संख्या छात्रों से अधिक रही। वर्ष 2021 में 150 विद्यार्थियों में से 84 छात्राएं थीं, जबकि वर्ष 2022 में 77 छात्राओं ने प्रवेश लिया।
चार बैचों से निकले 514 डॉक्टर
वर्ष 2018 से 2021 तक के चार बैचों का एमबीबीएस कोर्स पूरा हो चुका है। इन चार बैचों से कुल 514 डॉक्टर बने हैं, जिनमें 260 पुरुष और 254 महिला डॉक्टर शामिल हैं। यह आंकड़ा दर्शाता है कि चिकित्सा शिक्षा में महिलाओं की भागीदारी तेजी से बढ़ रही है।
वर्ष छात्र छात्राएं कुल डॉक्टर
2018 55 44 99
2019 69 63 132
2020 82 64 146
2021 54 83 137
कुल 260 254 514
2021 बैच ने रचा इतिहास
महिला डॉक्टरों की बढ़ती संख्या में वर्ष 2021 का बैच मील का पत्थर साबित हुआ। इस बैच में 54 छात्रों के मुकाबले 83 छात्राएं डॉक्टर बनीं। यह पहली बार था जब किसी बैच में पुरुषों की तुलना में कहीं अधिक महिला डॉक्टर तैयार हुईं।
समाज में बदल रही सोच
राजकीय मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. महेश पुकार ने बताया कि चिकित्सा क्षेत्र में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी इस बात का संकेत है कि समाज में बालिकाओं की शिक्षा और करियर को लेकर पुरानी रूढ़ियां टूट रही हैं। उन्होंने कहा कि ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों में कई महिला मरीज, विशेषकर स्त्री एवं प्रसूति रोगों से जुड़ी समस्याओं को लेकर पुरुष डॉक्टरों के सामने खुलकर बात करने में संकोच करती हैं। महिला डॉक्टरों की बढ़ती संख्या से महिलाओं के इलाज के लिए आगे आने की प्रवृत्ति में सकारात्मक सुधार हो रहा है।
वही इस बदलाव पर डॉ. रिजवाना खान का कहना है कि आज बेटियां हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा साबित कर रही हैं। मेडिकल शिक्षा में बढ़ती भागीदारी यह दर्शाती है कि परिवार अब बेटियों के सपनों को भी बराबर महत्व दे रहे हैं।
वही डॉ. पूजा बेदा का कहना है कि महिला डॉक्टरों की संख्या बढ़ने से खासकर ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल रही हैं। यह बदलाव समाज में बढ़ती जागरूकता और शिक्षा का सकारात्मक परिणाम है।
बेटियां संभाल रही हैं स्वास्थ्य सेवा की जिम्मेदारी
चूरू मेडिकल कॉलेज के आंकड़े बताते हैं कि बेटियां अब केवल शिक्षा में ही नहीं, बल्कि चिकित्सा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में भी बराबरी से आगे बढ़ रही हैं। डॉक्टर बनने वाली छात्राओं की बढ़ती संख्या स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक संवेदनशील एवं सुलभ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

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