त्रिदिवसीय तेरापंथ किशोर मण्डल का अधिवेशन गुरु सान्निधि में सम्पन्न
अबूबकर बल्खी
लाडनूं (नवयत्न) । सुधर्मा सभा में आयोजित प्रातःकालीन मुख्य मंगल प्रवचन कार्यक्रम में उपस्थित आचार्यश्री महाश्रमण ने निर्धारित विषय ‘ज्यादा तेज न चलें’ के आधार पर पावन पाथेय प्रदान करते हुए कहा कि सामान्यतया साधु को ज्यादा तेज नहीं चलना चाहिए। कोई कठिनाई अथवा विशेष परिस्थिति की बात अलग है, किन्तु साधु को ज्यादा तेज नहीं चलना चाहिए। ज्यादा तेज चलना जीव विराधना का कारण बन सकता है। जितना संभव हो सके, पैरों से ही चलने का प्रयास होना चाहिए। पदयात्रा में ईर्या समिति की जितनी अच्छी पालना हो सकती है, साधना का प्रयोग करने वाले को तो बिल्कुल भी नहीं होती। द्रुत गति से चलने वाला साधु पाप श्रमण की श्रेणी में आ सकता है। साधु के लिए सुन्दर बताई गई है कि साधु को द्रुत गति से चलने से बचने का प्रयास होना चाहिए। साधु की गति मंद और सुन्दर होनी चाहिए। प्रवचन के उपरान्त मुनि नमिकुमार ने आचार्यश्री से 42 की तपस्या का प्रत्याख्यान किया। आचार्यश्री ने उन्हें मंगल आशीर्वाद प्रदान किया। आचार्यश्री की मंगल सन्निधि में अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद के तत्त्वावधान में तेरापंथ युवक परिषद का त्रिदिवसीय 21वां राष्ट्रीय अधिवेशन कार्यक्रम का मंचीय उपक्रम रहा। इस संदर्भ में अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष पवन माण्डोत, सौरभ पटावरी, मयंक धाकड़ ने अपनी अभिव्यक्ति दी। अधिवेशन में सम्मिलित किशोरों ने गीत का संगान किया। आचार्यश्री ने किशोरों को पावन पावन पाथेय प्रदान करते हुए कहा कि अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद से जुड़ा हुआ यह किशोर मण्डल है। जानकारी मिली कि चारित्रात्माओं की रास्ते की सेवा में किशोरों का अपना योगदान है।