तंबाकू सेवन से गंभीर रोग होने की संभावना के साथ ही शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता में कमी आती है

तंबाकू निषेध दिवस

टोंक,(दिनेश शर्मा)31 मई। हर साल 31 मई को तम्बाकू के कुप्रभाव से दुनिया को बचाने के लिये विश्व तंबाकू निषेध दिवस मनाया जाता हैं। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अशोक कुमार यादव ने जिलेवासियों से तंबाकू, पानमसाला एवं अन्य व्यसनकारी पदार्थों का सेवन त्याग करके स्वस्थ जीवन चुनने की अपील की है। डॉ. यादव ने विश्व तम्बाकू निषेध दिवस के अवसर पर अपने संदेश में यह अपील की।

उन्होंने जिलेंवासियो से स्वयं तम्बाकू पदार्थो का सेवन छोडऩे के साथ ही अपने परिजनों, मित्रों एवं साथियों को भी तंबाकू एवं व्यसनकारी पदार्थों का सेवन नहीं करने के लिए प्रेरित करने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि विशेषज्ञों के अनुसार तंबाकू सेवन से गंभीर रोग होने की संभावना के साथ ही शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता में कमी आती है, जिससे कोरोना सहित अन्य संक्रमण होने की संभावना बढ़ सकती है। तंबाकू सेवन करने वाले व्यक्तियों के उपचार में भी जटिलता रहती है। डॉ यादव ने बताया कि तंबाकू पदार्थों के सेवन छोडऩे के लियें जिला अस्पताल में तंबाकू मुक्ति केंद्र संचालित किया जा रहा हैं। साथ ही टोल फ्री हेल्पलाइन नंबर 104 पर भी परामर्श सुविधाएं उपलब्ध है।

डिप्टी सीएमएचओं डॉ. महबूब खान ने बताया कि तम्बाकु को जहर भी कहा जा सकता है, यह ऐसा जहर जिसके खाने का लत लग जाए तो चाहकर भी नहीं छोड़ा जा सकता। इसका सेवन करके व्यक्ति धीरे-धीरे मौत के मुँह में जाता रहता हैं। उन्होने बताया कि तम्बाकू खाने के कई हानिकारक दुष्प्रभाव है। तम्बाकू के प्रकार बीड़ी, सिगरेट, सिगार, जर्दा, खैनी, चिलम, हुक्का, गुटखा, तम्बाकू वाला पान इत्यादि ये सभी तम्बाकू से बने होते हैं यदि आप इनमें से किसी का भी सेवन कर रहे है तो इसका सीधा सा मतलब है कि आप तम्बाकू के नशे में हैं। तम्बाकू में मादकता या उतेजना प्रदान करने वाला सबसे हानिकारक तत्व निकोटीन पाया जाता है। इसकी मात्रा शरीर में बढ़ जाने से यह मृत्युदूत कि तरह कार्य करता है।

तंबाकू में कई तरह के हानिकारक तत्व होते हैं, जिनसे कैंसर हो सकता है। इनमें निकोटीन तथा कार्बन मोनोऑक्साइड गैस प्रमुख हैं। धुएं से निकलने वाली कार्बन मोनोऑक्साइड गैस जहरीली होने के साथ-साथ शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा को कम कर देती है, जिससे शरीर के कई महत्वपूर्ण अंग जैसे कि दिमाग, हृदय, फेफड़े ठीक तरह से कार्य नही कर पाते। निकोटीन रक्तचाप को बढ़ाता है जिससे दिल का दौरा पडऩे की संभावना बढ़ जाती हैं। इन दोनों के अलावा तम्बाकू में कैंसर उत्पन्न करने वाले अनेक तत्व तथा रसायन पाये जाते हैं, जैसे की टार, मार्श गैस, अमोनिया, कोलोडान, पापरीडिन, फॉस्फोरल प्रोटिक अम्ल, परफैरोल, ऐजालिन सायनोजोन, कोर्बोलिक ऐसिड, बेनजीन इत्यादि।

तंबाकू सेवन से होने वाली बीमारियाँ तथा स्वास्थ्य पर पडऩे वाले दुष्प्रभाव:-
तम्बाकू से कैंसर :
कैंसर होने के कारणों में सबसे बड़ा योगदान तम्बाकू का ही होता हैं। तम्बाकू के सेवन से अनेक प्रकार के होने वाले रोगों में कैंसर प्रमुख हैं। इससे फेफड़े का कैंसर हो सकता है, मुँह का कैंसर हो सकता है या फिर गले अथवा श्वसन नली का कैंसर हो सकता हैं। इसके अलावा पेट का कैंसर, किडनी तथा पैंक्रियाज में होने वाले कैंसर, ब्लैडर और मूत्राशय संबंधी रोगों में भी तम्बाकू महत्वपूर्ण भूमिका निभाता हैं।

तम्बाकू से हृदय संबंधी रोग:
तम्बाकू से होने वाले मुख्य रोगों में कैंसर के बाद हृदय संबंधी रोग आते हैं। रक्त में निकोटीन तथा कार्बन की मात्रा बढ़ जाने से शरीर के नसों में थक्के जम जाते हैं, जिससे रक्त परिवहन में समस्या आ जाती है और शरीर का परिवहन तंत्र प्रभावित हो जाता हैं।

तम्बाकू का फेफड़ों पर प्रभाव:
मनुष्य का मुख्य श्वशन अंग फेफड़ा हैं। धुआंयुक्त तम्बाकू का सेवन हमारे फेफड़ो पर बहुत ही बुरा असर डालते हैं। यदि आप किसी दुसरे व्यक्ति के द्वारा छोड़े गये तम्बाकू का धुआं ग्रहण कर लेते है तो आपके फेफड़ो का भी उतना ही नुकसान होगा जितना उस तम्बाकू पीने वाले के फेफड़ों का होगा।

तम्बाकू सेवन से होते है कई तरह के रोग
तम्बाकू का सेवन पुरुष या महिला दोनों के प्रजनन क्षमता को प्रभावित करता है, पुरुषों में तम्बाकु के सेवन से शुक्राणुओं की संख्या कम हो जाती है, जिससे नपुंसकता हो सकता हैं, जबकि स्त्रियों में तम्बाकू के सेवन से बाँझपन हो सकता हैं। गर्भावस्था के दौरान गर्भपात हो जाने की आशंका बनी रहती है तथा भ्रूण का विकास प्रभावित होता है।

तम्बाकू में पाए जानेवाले फोस्फोरल प्रोटिक एसिड के कारण टी. बी. रोग तथा परफैरोल के कारण दांत पीले, मैले और कमजोर हो जाते हैं। तंबाकू से होने वाले ल्यूकोप्लाकिया रोग के कारण आपके दांत और मसूड़े सडऩे लगते हैं।

तम्बाकू का ज्यादा नशा करने से स्वाद तथा सूंघने की शक्ति प्रभावित होती हैं । इसके ज्यादा सेवन से मुँह से दुर्गन्ध आती रहती है, साथ ही हमारी लार ग्रंथि भी बहुत ज्यादा प्रभावित होती जिसके फलस्वरुप भोजन के पाचन में परेशानी होने लगती हैं। कभी-कभार छाती में दर्द होना, जकडऩ होना, आँख से दिखाई कम पडऩा, सिर में दर्द होना, रक्तचाप बढ़ जाना तम्बाकू के प्रभाव के कारण हो सकता हैं। तम्बाकू के कारण होने वाले रोगों से हमारी त्वचा काफी हद तक प्रभावित होती है जिससे आपका शरीर ऐसा दिखने लग जायेगा जैसे की आप बूढ़े हो चुके है। आप शारीरिक तौर पर भी काफी कमजोर हो जायेंगे।

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