32 परीक्षाएं, 21 इंटरव्यू… 61वीं रैंक से बने असिस्टेंट कमांडेंट

बाबूलाल वर्मा
झुंझुनूं (नवयत्न)। झुंझुनूं की धरती ने देश को एक और होनहार सपूत दिया है। छोटे से गांव बुडानिया के अजय बुडानिया ने 25 साल की उम्र में यूपीएससी परीक्षा में ऑल इंडिया 61वीं रैंक हासिल कर असिस्टेंट कमांडेंट का पद हासिल किया है। अजय की सफलता की खास बात यह है कि उन्होंने इस मुकाम तक पहुंचने के लिए 32 प्रतियोगी परीक्षाएं दीं और 21 इंटरव्यू का सामना किया। कई बार असफल होने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते रहे। सीनियर सेकेंडरी के बाद से ही अजय ने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी शुरू कर दी थी। स्नातक की पढ़ाई के साथ उन्होंने एनडीए, एयरफोर्स, नेवी, आईआईटी, सीडीएस, एएफसीएटी, सीपीओ, एसआई और आईबी सहित कई परीक्षाएं दीं। इस दौरान कुल 32 परीक्षाओं में शामिल हुए और 21 बार इंटरव्यू तक पहुंचे। भारतीय नौसेना में उनका चयन भी हुआ, लेकिन उन्होंने अपनी मंजिल को बड़ा मानते हुए जॉइन नहीं किया। अजय कहते हैं कि हर परीक्षा और हर असफलता ने उन्हें कुछ नया सिखाया। इससे उनका आत्मविश्वास बढ़ता गया और उन्होंने तय कर लिया कि किसी भी परिस्थिति में हिम्मत नहीं हारनी है।
2023 में पहली कोशिश, 2025 में रचा इतिहास
अजय ने 2023 में पहली बार यूपीएससी परीक्षा दी थी, लेकिन मेरिट में जगह नहीं बना सके। इसके बाद उन्होंने तैयारी जारी रखी और 2025 की परीक्षा में ऑल इंडिया 61वीं रैंक हासिल कर ली। इस दौरान वे सीपीओ परीक्षा पास कर सीआरपीएफ में सब इंस्पेक्टर भी बने। वर्ष 2025 से उनकी एक साल की कठिन ट्रेनिंग शुरू हुई, जो जुलाई 2026 में पूरी हुई। ट्रेनिंग के बाद उन्हें अनंतनाग, कश्मीर में पोस्टिंग मिली। ड्यूटी ज्वाइन किए अभी आठ दिन ही हुए थे कि यूपीएससी का परिणाम आया और अजय को देशभर में 61वीं रैंक मिलने की खुशखबरी मिली।
बचपन से ही देशसेवा का जुनून
अजय की शुरुआती शिक्षा झुंझुनूं में हुई। परिवार में भी देशसेवा की भावना रही है। स्कूल में राष्ट्रीय पर्व और कार्यक्रमों के दौरान वे देशभक्ति से जुड़े नाटकों और प्रस्तुतियों में बढ़-चढक़र हिस्सा लेते थे। यही रुचि आगे चलकर देशसेवा के जुनून में बदल गई।
नाना का मार्गदर्शन, माता-पिता का मिला साथ
अजय अपनी सफलता का श्रेय अपने नाना महावीर रणवा को देते हैं। उनका कहना है कि नाना ने हर कदम पर उनका हौसला बढ़ाया। वहीं पिता राजीव बुडानिया और माता विनोद देवी ने शारीरिक तैयारी में पूरा सहयोग किया। कसरत, व्यायाम और दौड़ की तैयारी के दौरान माता-पिता ने उनका रूटीन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
अभी मंजिल बाकी है
असिस्टेंट कमांडेंट बनने के बाद भी अजय ने आगे का लक्ष्य तय कर लिया है। उनका कहना है कि वे भविष्य में यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा पास करना चाहते हैं और इसके लिए तैयारी जारी रखेंगे।
गांव से गोपाल नगर तक खुशी की लहर
अजय की सफलता की खबर बुडानिया गांव और उनके वर्तमान निवास गोपाल नगर, सितसर पहुंचते ही परिवार और परिचितों में खुशी की लहर दौड़ गई। बधाई देने वालों का तांता लगा है और मिठाइयां बांटी जा रही हैं। अजय की कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है जो प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार प्रयास कर रहे हैं।

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