श्रीमद भागवत कथा का समापन

विनोद स्वामी
मुकुन्दगढ़ (नवयत्न) । मुकुन्दगढ़ के वार्ड नं 1 शिवालय में चल रही सात दिवसीय श्रीमद भागवत कथा के अंतिम दिन कथा का समापन हुआ। श्रीमद्भागवत कथा मे व्यास पीठ से कथा व्यास चित्रकूट के अवधेश शास्त्री ने कथा मे सुदामा चरित्र, परिक्षित मोक्ष की कथा के बाद व्यास पूजन किया गया। कथा व्यास ने प्रसंग में सुनाया कि भगवान श्री कृष्ण ने 16 हजार 108 विवाह किये भगवान स्वयं भी गृहस्थ आश्रम आये। पति पत्नी को भी भगवान का भजन करना चाहिए। भगवान ने भीम के द्वारा जरासन्द का बध किया । सुदामा भगवान के अनन्य भक्त सुदामा के उपर कृपा कि। विधाता का लेख भगवान कृपा करें तो बदल सकता है जीव व ब्रह्भ का मिलन ही कृष्ण सुदामा मिलन है । कथा व्यास ने बताया कि कलयुग में राम का नाम ही आधार है नाम जप से बड़ा कोई तप नही। दत्रात्र्ये जी ने 24 गुरु बनाये थे मनुष्य के जीवन मे भी गुरु होना आवश्यक है । श्री मद भागवद कथा के श्रवण से व कीर्तन से हमारे समस्त पाप व क्लेश दूर होते हैं । श्री मद भागवत कथा हमे जीने की कला सिखाती है व मृत्यु को सुधारती है समस्त पापों का उन्मूलन करती है व जीवन मे श्री मद भागवत कथा श्रवण करनी चाहिए। श्री मद भागवत कथा का फल नाम जप ही फल है । जिस नाम मे हमारी श्रद्धा हो वही नाम अवश्य करें। यज्ञ हुआ जिसमें पूर्णआहुति दी गई। आरती कर भोग लगाकर प्रसाद वितरण किया गया। मोहल्लेवाशियो की ओर से व्यास पीठ का सम्मान किया गया। इस अवसर पर दिलीप मीणा, दिनेश चेजारा, राजेश शर्मा, विजय शर्मा, नितिन शर्मा, मुरारी , विनोद , सांवर मल शर्मा, चिरंजी लाल, प्रमोद चेजारा, शंकर सहित बड़ी संख्या मे गणमान्यजन मौजूद रहे।

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