भगवान तक पहुंचने का प्रथम माध्यम हमारे माता-पिता – त्रिभुवन पुरी जी महाराज

नवरतन वर्मा
रतनगढ़ ( नवयत्न) । रतनगढ़ में बृजदासी सेवा श्रम ट्रस्ट के तत्वावधान में छैल बिहार मंदिर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिवस पर भगवान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव श्रद्धा, उल्लास एवं भक्ति भाव के साथ मनाया गया। कथा स्थल को आकर्षक सजावट एवं मनमोहक झांकियों से सजाया गया। भगवान श्रीकृष्ण जन्म के प्रसंग पर श्रद्धालुओं ने भजनों, जयकारों और पुष्पवर्षा के साथ उत्सव मनाया।इस अवसर पर कथावाचक त्रिभुवन पुरी जी महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण जन्म की कथा का भावपूर्ण वर्णन करते हुए कहा कि भगवान तक पहुंचने का प्रथम माध्यम हमारे माता-पिता हैं। माता-पिता ही हमें इस संसार में लाकर जीवन प्रदान करते हैं, इसलिए उनकी सेवा, सम्मान एवं आज्ञा पालन करना प्रत्येक व्यक्ति का सर्वोच्च धर्म होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति अपने माता-पिता का सम्मान करता है, उस पर सदैव भगवान की कृपा बनी रहती है। इससे पूर्व कथा के पांचवें दिवस के यजमान श्री गोपाल महर्षि ने सपत्नी व्यासपीठ की पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद प्राप्त किया। इस अवसर पर राजकुमार चौधरी, देवीदत्त स्वामी, मदन कौशिक, नरेंद्र नाथोलिया, शारदा देवी इंदौरिया, सुशील इंदौरिया, रविकांत शर्मा, रवि इंदौरिया, विष्णु धरेन्द्र, पीरूमल भार्गव, कमल महर्षि, हेमंत इंदौरिया, प्रदीप महर्षि, जगदेव साँखोलिया, पंडित श्याम सुंदर, किशन महर्षि, धनराज इंदौरिया, शंकर कम्मा, राकेश जाजू, बाबूलाल इंदौरिया, प्रकाश पारीक, हरि प्रसाद पारीक, हरि बूँटोलिया एवं महेश लुण्डिया सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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