कांग्रेस राज का एक और गड़बड़झाला हुआ एक्सपोज

संजय सोनी
झुंझुनू (नवयत्न) । कांग्रेस राज में भर्तियों की गड़बड़ी को लेकर तो आए दिन खुलासे हो रहे है। लेकिन कांग्रेस राज में वैधानिक संस्थाओं में भी अयोग्य लोगों को नियुक्तियां देने में जमकर गड़बड़ी की है। जिसका खुलासा झुंझुनूं की कोतवाली पुलिस की एक कार्रवाई में हुआ है। दरअसल कांग्रेस राज में तीन साल पहले दर्ज एक एफआईआर में कोतवाली पुलिस ने बाल कल्याण समिति झुंझुनूं की पूर्व अध्यक्ष अर्चना चौधरी और उनके पति दिनेश कुमार को गिरफ्तार किया है। दोनों झुंझुनूं शहर के इंदिरा कॉलोनी के रहने वाले है। पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार में छह अक्टूबर 2021 को अर्चना चौधरी को प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट की शक्तियां प्राप्त न्यायपीठ बाल कल्याण समिति झुंझुनूं के अध्यक्ष पद पर नियुक्त किया गया था। इसके बाद आरटीआई कार्यकर्ता राजेश अग्रवाल ने अर्चना चौधरी की नियुक्ति पर सवाल उठाते हुए जून 2022 से मुख्यमंत्री तक दर्जनों बार शिकायतें की। शिकायत में उनके खिलाफ जम्मू में चोरी जैसी धाराओं में आपराधिक मामलों में संलिप्तता तथा बाल कल्याण समिति में नियुक्ति के लिए अनिवार्य योग्यता ना होने की शिकायतें प्रमुख थी। लेकिन कोई कार्रवाई नहीं। शिकायतों पर कार्रवाई ना होने पर एफआईआर दर्ज करवाने के लिए झुंझुनूं कोतवाली और एसपी कार्यालय के चक्कर लगाए। वहां से भी सकारात्मक कदम नहीं उठाया गया। इसके बाद राजेश अग्रवाल ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट के आदेश पर करीब पौने तीन साल पहले 10 जुलाई 2023 को कोतवाली झुंझुनूं में मामला दर्ज किया गया। पुलिस ने इस दौरान एएसआई से लेकर एएसपी स्तर तक के अधिकारियों से जांच करवाई। अंतिम जांच सीआईडी सीबी जयपुर के एएसपी द्वारा की गई। जिसमें जांच अधिकारी ने आईपीसी की धारा 120बी, 420, 467, 468, 471 में अर्चना चौधरी और उनके पति दिनेश कुमार को आरोपित मानते हुए फाइल कोतवाली झुंझुनूं को भेज दी। कोतवाली पुलिस ने दोनों आरोपितों पूर्व अध्यक्ष अर्चना चौधरी और उनके पति दिनेश कुमार को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया। जहां से उन्हें पुलिस रिमांड पर भेजा गया है। चर्चा है कि दिनेश कुमार सेना से जुड़ा हुआ है। जिसके कारण पुलिस इस मामले में अभी ज्यादा खुलासा नहीं कर रही। लेकिन एएसपी देवेंद्र सिंह ने एक मीडियाकर्मी को दी जानकारी में दोनों की गिरफ्तारी की पुष्टि की है। साथ ही पुलिस की अधिकारिक वेबसाइट पर भी दोनों की फोटो स हित 22 मई की तारीख में गिरफ्तारी अपडेट की गई है।
विधानसभा में उठा मुद्दा, पर कांग्रेस सरकार ने नहीं की कार्रवाई
इस मामले को विधानसभा में भाजपा विधायक रामलाल शर्मा तथा भाजपा विधायक राजेंद्र राठौड़ में भी उठाया था। राजस्थान विधानसभा के नियम और प्रक्रियाओं के नियम 131 के तहत प्रश्न रखा था कि बाल कल्याण समिति झुंझुनूं के अध्यक्ष पद पर अर्चना की नियुक्ति कर दी। जबकि वह योग्यता नहीं रखती। लेकिन कांग्रेस सरकार ने फिर भी कोई कार्रवाई नहीं की।
पुलिस ने सभी प्रमाण पत्र के लिए की टिप्पणी ‘वैध नहीं पाया गया
परिवादी राजेश अग्रवाल द्वारा कोर्ट के जरिए इस मामले की इसी साल फरवरी में मांगी गई प्रोग्रेस रिपोर्ट ने पुलिस ने अर्चना चौधरी द्वारा लगाए गए तीनों के तीनों प्रमाण को लेकर ‘वैध नहीं’ का टिप्पणी की है। पुलिस ने इस प्रोग्रेस रिपोर्ट में बताया है कि अर्चना चौधरी ने श्रीगंगानगर, मेरठ और झुंझुनूं की स्कूलें के अनुभव प्रमाण पत्र अपने आवेदन के साथ लगाए थे। इनमें श्रीगंगानगर की स्कूल का अनुभव प्रमाण पत्र मई 2010 से फरवरी 2014 तक का था। जबकि सत्र 2010—11 में अर्चना चौधरी ने उदयपुर की कॉलेज से एमएड की पढाई की। इसी तरह मेरठ की स्कूल का प्रमाण पत्र 25 मई 2015 से 30 मई 2017 का लगाया गया था। जिसका रिकॉर्ड भी करीब दो साल की बजाय 13 माह का ही मिला। इसी तरह झुंझुनूं की स्कूल तो कोई प्रमाण पत्र जारी करने से ही इंकार कर दिया। रिपोर्ट में पुलिस ने ‘वैध नहीं’ पाया गया कि टिप्पणी के साथ लिखा है कि सभी अनुभव प्रमाण पत्रों को देखा जाए तो अर्चना चौधरी के पास कुल श्रीगंगानगर की एक स्कूल का 3 साल तथा मेरठ की एक स्कूल 13 माह का प्रमाण पत्र ही मिला। जो बाल कल्याण समिति में नियुक्ति के लिए पर्याप्त नहीं था। जबकि आवेदन में अर्चना चौधरी ने अपना अनुभव शिक्षा​ विभाग में अध्यापन अनुभव 10 वर्ष तथा प्रधानाचार्य अनुभव दो वर्ष अंकित किया था।
जम्मू से मिला छह मामलों का रिकॉर्ड
जम्मू में दर्ज अर्चना चौधरी के खिलाफ आपराधिक प्रकरणों को लेकर भी पुलिस ने जांच की थी। प्रोग्रेस रिपोर्ट में बताया गया है कि अर्चना चौधरी के खिलाफ आपराधिक प्रकरणों के संबंध में जम्मू से रिकॉर्ड प्राप्त किया गया तो कुल छह प्रकरण दर्ज होकर आवेदन से पूर्व निस्तारित होने की जानकारी मिली है। जिसमें किसी भी प्रकरण में न्यायालय द्वारा दोषसिद्ध नहीं ठहराया गया है। बताया जा रहा है कि इनमें से पांच मामले आईपीसी की धारा 420 तथा एक मामला आईपीसी की धारा 380 के तहत था। जो धोखाधड़ी और चोरी से संबंधित थे।
पौने तीन साल में तीन बार फाइल हुई तलब
इस मामले में पौने तीन साल में तीन बार फाइल सीकर और जयपुर में तलब हुई। सबसे पहले कोतवाली थाने के एएसआई और दो एसआई ने मामले की जांच की। इसके बार कोतवाली थाने के सीआई, फतेहपुर के डीएसपी और अंत में सीआईडी सीबी के एएसपी ने मामले की जांच की। एफआईआर दर्ज होने के तीन महीने बाद ही तत्कालीन सीकर रेंज आईजी ने फाइल को तलब किया और इस मामले में तय नौ बिंदुओं को शामिल करते हुए जांच करने के आदेश दिए। इसके बाद फरवरी 2025 में भी जयपुर रेंज आईजी ने फाइल को तलब किया। जांच सीकर जिले के फतेहपुर डीएसपी को सौंपी गई। फतेहपुर डीएसपी की जांच के बाद फिर से फाइल एडीजी क्राइम के आदेश पर जयपुर रेंज आईजी ने जनवरी 2026 को फाइल को तलब किया और इसे सीआईडी सीबी जयपुर के एएसपी को भेजी।

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