गौ संरक्षण के बड़े-बड़े दावे करने वालों की व्यवस्थाओं की खुली पोल
स्थाई समाधान की मांग, कार्रवाई नहीं होने पर दी आंदोलन की चेतावनी
प्रदीप सैनी
दांतारामगढ़ /सीकर (नवयत्न)। दांता कस्बे के श्मशान भूमि के पास स्थित डंपिंग यार्ड में कचरे और कीचड़ से भरे दलदल में गौवंश के बार-बार फंसने की घटनाओं ने स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि यह स्थिति न केवल प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाती है, बल्कि पशुओं के प्रति संवेदनहीनता का भी उदाहरण है।
दांतारामगढ़ /सीकर (नवयत्न)। दांता कस्बे के श्मशान भूमि के पास स्थित डंपिंग यार्ड में कचरे और कीचड़ से भरे दलदल में गौवंश के बार-बार फंसने की घटनाओं ने स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि यह स्थिति न केवल प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाती है, बल्कि पशुओं के प्रति संवेदनहीनता का भी उदाहरण है।
जानकारी के अनुसार डंपिंग यार्ड में फैले कचरे और सीवरेज व बरसाती पानी के कारण गहरे दलदली हालात बन गए हैं, जहां भोजन की तलाश में पहुंचने वाले गौवंश फंस जाते हैं। कई बार स्थानीय लोगों को मशक्कत कर उन्हें बाहर निकालना पड़ता है। इस प्रकार की घटनाओं से गौवंश की जान पर भी खतरा मंडरा रहा है।
स्थानीय नागरिकों ने इस स्थिति को अत्यंत दुखद और शर्मनाक बताते हुए कहा कि गौवंश केवल आस्था का विषय नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और संवेदनाओं का प्रतीक है। उन्होंने आरोप लगाया कि गौ संरक्षण के बड़े-बड़े दावे करने वालों की व्यवस्थाओं की वास्तविकता इस घटना से उजागर हो रही है।
लोगों ने प्रशासन और राज्य सरकार से मांग की है कि मामले की गंभीरता से जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों एवं संबंधित ठेकेदार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही डंपिंग यार्ड की उचित व्यवस्था, कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण तथा गौवंश की सुरक्षा के लिए स्थायी समाधान सुनिश्चित किया जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
इस मामले को लेकर क्षेत्र में चर्चा का माहौल है और नागरिकों ने जल्द कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी भी दी है।
इनका कहना है :
डंपिंग यार्ड क्षेत्र का निरीक्षण कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी तथा समस्या के समाधान के लिए जल्द कदम उठाए जाएंगे। – भूपेश शर्मा, अधिशाषी अधिकारी, नगरपालिका दांता।