18 माह से गंदे पानी में मुख्य मार्ग, ग्रामीणों का फूटा गुस्सा
निसं
टमकोर (नवयत्न)। लंबे समय से प्रशासनिक उदासीनता का सामना कर रहे टमकोर के ग्रामीणों का सब्र आखिरकार सोमवार को टूट गया। गांव के बस स्टैंड स्थित मुख्य सडक़, जो जाबासर होते हुए मलसीसर और झुंझुनूं को जोड़ती है को ग्रामीणों ने पत्थर और लकडिय़ां डालकर बंद कर दिया। करीब 18 माह से सडक़ पर जमा गंदे और बदबूदार पानी से परेशान लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि मंगलवार सुबह तक सफाई कार्य शुरू नहीं हुआ तो गांव के अन्य प्रमुख रास्तों को भी बंद कर दिया जाएगा। ग्रामीणों के अनुसार सडक़ किनारे बना गंदे पानी का नाला पिछले लगभग डेढ़ वर्ष से बंद पड़ा है, जिसके कारण सारा गंदा पानी मुख्य सडक़ पर जमा रहता है। इस समस्या को लेकर मुख्यमंत्री शिकायत पोर्टल, ग्राम पंचायत, पंचायत समिति सहित विभिन्न प्रशासनिक स्तरों पर बार-बार शिकायतें दर्ज करवाई गई लेकिन आज तक समाधान नहीं हो पाया। यह सडक़ टमकोर की जीवनरेखा मानी जाती है जो मलसीसर, झुंझुनूं सहित आसपास के अनेक गांवों को जोड़ती है। प्रतिदिन हजारों ग्रामीण, विद्यार्थी, कर्मचारी और व्यापारी इसी मार्ग से आवागमन करते हैं लेकिन उन्हें मजबूरन गंदे और बदबूदार पानी के बीच से गुजरना पड़ रहा है।
बस सेवा भी हुई प्रभावित
ग्रामीणों द्वारा सडक़ बंद किए जाने के बाद झुंझुनू से आने वाली बसें गांव के बस स्टैंड तक नहीं पहुंच सकी और गांव के बाहर ही खड़ी रही। इससे यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा तथा उन्हें पैदल आवाजाही करनी पड़ी।
कारोबार पर पड़ा असर
मुख्य सडक़ पर स्थित दुकानदारों का कहना है कि जलभराव के कारण उनका व्यवसाय भी प्रभावित हो रहा है। मनीराम प्रजापत पीडि़त दुकानदारने बताया कि मेरी हार्डवेयर की दुकान इसी सडक़ पर स्थित है। पिछले लगभग 18 माह से दुकान के सामने गंदा पानी भरा हुआ है। ग्राहक आने से कतराते हैं जिससे व्यापार प्रभावित हो रहा है। बदबू इतनी अधिक है कि दुकान पर बैठना और सांस लेना तक मुश्किल हो गया है।
प्रस्ताव बहुत हुए लेकिन जमीन पर काम शून्य
वार्ड पंच एवं स्थानीय निवासी कृष्ण प्रजापत ने ग्राम पंचायत की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि पिछले दो वर्षों से ग्राम पंचायत की बैठकों में सफाई और जल निकासी के प्रस्ताव लिए जा रहे हैं लेकिन धरातल पर कोई कार्य नहीं हुआ। ग्रामीणों ने एक सडक़ बंद की है। यदि मंगलवार सुबह तक समाधान शुरू नहीं हुआ तो गांव के सभी मुख्य रास्ते बंद कर दिए जाएंगे। इसके बाद उत्पन्न होने वाली स्थिति की पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
बार-बार शिकायतों के बाद भी नहीं हुआ समाधान
वार्ड पंच जुगलकिशोर और कृष्ण प्रजापत ने बताया कि इस समस्या को लेकर कई बार संबंधित अधिकारियों को अवगत कराया गया लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिले। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन की लगातार अनदेखी के कारण उन्हें यह कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ा।
समझाइश के लिए पहुंचे अधिकारी, ग्रामीण अड़े
सडक़ बंद होने की सूचना मिलने पर सहायक विकास अधिकारी विमल जांगिड़ मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों से समझाइश की। हालांकि ग्रामीणों ने साफ शब्दों में कहा कि अब केवल आश्वासन नहीं बल्कि धरातल पर कार्रवाई चाहिए। जब तक सफाई और जल निकासी का कार्य शुरू नहीं होता, आंदोलन जारी रहेगा।
बड़ा सवाल
जब एक मुख्य सडक़ पर 18 माह तक गंदा पानी जमा रहे, हजारों लोग रोजाना परेशानी झेलें, दुकानदारों का कारोबार प्रभावित हो और बार-बार शिकायतों के बावजूद समाधान न हो, तो यह प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासन ग्रामीणों की इस चेतावनी को कितना गंभीरता से लेता है और समस्या का स्थायी समाधान कब तक करता है।