तीन गर्भवतियों का हीमोग्लोबिन 3.6 से 6.8 ग्राम तक पहुंचा, समय पर रक्त मिला तो टला बड़ा खतरा
अशोक राईका
झुंझुनूं (नवयत्न)। गंभीर एनीमिया (खून की कमी) से पीडि़त तीन गर्भवती महिलाओं को समय पर खून मिलने से उनकी और गर्भ में पल रहे शिशु की जान का खतरा काफी कम हो गया। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग और बीडीके अस्पताल की टीम ने समय पर इलाज कर तीनों महिलाओं का रक्ताधान कराया।
सीएमएचओ डॉ. छोटेलाल गुर्जर ने बताया कि खेतड़ी के मेहाड़ा गांव की गणगौर, सूरजगढ़ के बलौदा गांव की जीवनबाला और उदयपुरवाटी की प्रियंका सैनी को गर्भावस्था के दौरान गंभीर एनीमिया होने पर हाई रिस्क श्रेणी में रखा गया था। तीनों को बीडीके अस्पताल के ब्लड सेंटर से समय पर खून उपलब्ध कराया गया। जरूरत पडऩे पर आगे भी रक्त चढ़ाया जाएगा। पीएमओ डॉ. जितेंद्र भांभू ने बताया कि गणगौर का हीमोग्लोबिन 6.8 ग्राम, प्रियंका का 4.3 ग्राम और जीवनबाला का सिर्फ 3.6 ग्राम था, जो सामान्य से काफी कम है। समय पर इलाज मिलने से प्रसव के दौरान होने वाले खतरे को काफी हद तक टाल दिया गया।
तीनों महिलाओं का इलाज स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. सुशीला भूरिया की निगरानी में चल रहा है। वहीं, ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. राकेश कुमार ने स्वैच्छिक रक्तदाताओं की मदद से समय पर खून उपलब्ध कराया। डॉ. भांभू ने कहा कि गर्भावस्था में समय-समय पर जांच कर खून की कमी का पता लगाना और जरूरत पडऩे पर तुरंत इलाज कराना सुरक्षित मातृत्व के लिए बहुत जरूरी है। इससे मां और बच्चे, दोनों की जान बचाई जा सकती है।