झुंझुनू नगर परिषद में भाजपा का बोर्ड, राज जीतेगा! नीति हारेगी!! खेतड़ी बना उदाहरण

कासं

झुंझुनू (नवयत्न)। सत्ता की भूख कभी शांत नहीं होती और राजनीति में कोई स्थायी दोस्त या दुश्मन नहीं होता झुंझुनू की निकाय राजनीति में बुधवार को यही चर्चा दिनभर जिला मुख्यालय की सड़कों से लेकर राजनीतिक गलियारों तक सुनाई देती रही। नगर परिषद के 60 वार्डों के चुनाव में कांग्रेस के 30, भाजपा के 15 और निर्दलीय 15 पार्षद जीतकर आए हैं। सभापति बनाने के लिए 31 पार्षदों का समर्थन जरूरी है। कांग्रेस बहुमत से महज एक कदम दूर है, जबकि भाजपा को अपने 15 पार्षदों के अलावा 16 और पार्षदों का समर्थन जुटाना होगा। इसके बावजूद राजनीतिक चर्चाओं में भाजपा के बोर्ड बनने की संभावना को लेकर दिनभर कयास चलते रहे।

इन चर्चाओं को हवा खेतड़ी और बगड़ में सामने आए घटनाक्रमों ने दी। खेतड़ी में कांग्रेस के चुनाव चिन्ह पर वार्ड नंबर 5 से जीतकर आई गीता सैनी का राजनीतिक रुख बदल गया और वे भाजपा के साथ आ गई। वहीं बगड़ में भाजपा पदाधिकारी पार्टी से टिकट की दावेदार रहे राकेश शर्मा ने टिकट नहीं मिलने पर निर्दलीय के रूप में चुनाव लड़ा, जीत हासिल की और अब अपने समर्थक पार्षदों के साथ कांग्रेस का दामन थाम लिया। दोनों घटनाक्रमों को लेकर झुंझुनू में यह सवाल उठ रहा है कि निकाय राजनीति में राजनीतिक समीकरण नीति और विचारधारा से ऊपर हैं या नहीं।

 

कांग्रेस के टिकट पर जीती, अब भाजपा से निर्विरोध अध्यक्ष

 

खेतड़ी नगर पालिका के 25 वार्डों में भाजपा के 8, कांग्रेस के 4 और निर्दलीय 13 पार्षद निर्वाचित हुए। भाजपा के टिकट पर वार्ड 4 से सजना, वार्ड 6 से सुनीता, वार्ड 8 से अकबर, वार्ड 16 से ममता, वार्ड 18 से रामकला, वार्ड 19 से सुमन और वार्ड 23 से प्रताप सिंह सहित अन्य भाजपा प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की। लेकिन भाजपा ने कांग्रेसी पर जताया भरोसा।

वहीं कांग्रेस के टिकट पर वार्ड नंबर 5 से गीता सैनी ने 178 मतों से जीत हासिल की। उनके सामने भाजपा के नरेंद्र कुमार थे, जिन्हें महज 7 मत मिले। चुनाव परिणाम के बाद गीता सैनी भाजपा के साथ आ गईं और अब पालिकाध्यक्ष पद के लिए उनका निर्विरोध चुना जाना लगभग तय हो गया है। नामांकन के दौरान उनके अलावा कोई दूसरा नामांकन नहीं होने से उनके निर्विरोध निर्वाचन की स्थिति बनी है।

यही घटनाक्रम झुंझुनू में चर्चा का बड़ा कारण बना। लोग सवाल कर रहे हैं कि जब चुनाव जनता ने किसी राजनीतिक दल के चिन्ह पर लड़कर जिताया तो बाद में राजनीतिक पाला बदलने को लोकतांत्रिक जनादेश किस रूप में देखता है?

 

बगड़ में उलटा खेल, भाजपा का चेहरा कांग्रेस के साथ

 

बगड़ में कहानी इसके ठीक उलट नजर आई। भाजपा से टिकट की मांग कर रहे पार्टी पदाधिकारी राकेश शर्मा को पार्टी ने टिकट नहीं दिया तो उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में उतरकर जीत हासिल की। अब राकेश शर्मा अपने समर्थक पार्षदों के साथ कांग्रेस में शामिल हो चुके हैं और पालिकाध्यक्ष पद की दौड़ में कांग्रेस के साथ खड़े नजर आ रहे हैं।

यानी एक तरफ खेतड़ी में कांग्रेस के टिकट पर जीती गीता सैनी भाजपा के साथ आकर अध्यक्ष बनने की स्थिति में पहुंची, तो दूसरी तरफ बगड़ में भाजपा से टिकट की दावेदारी करने वाले राकेश शर्मा निर्दलीय जीतने के बाद कांग्रेस के साथ जा पहुंचे।

 

मंडावा में होटल पर पुलिस की दबिश से भी गरमाई राजनीति

 

इसी बीच मंडावा में एक निजी होटल में पार्षदों की मौजूदगी को लेकर पुलिस की तलाशी की कार्रवाई ने भी राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया। मंडावा विधायक रीटा चौधरी मौके पर पहुंची। विधायक ने पूर्व सांसद नरेंद्र कुमार और भाजपा पर कांग्रेस को बोर्ड बनाने से रोकने के लिए सत्ता के प्रभाव का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। हालांकि पुलिस की कार्रवाई के दौरान विधायक की मौजूदगी के बाद मामला आगे बड़ी कार्रवाई तक नहीं पहुंचा।

 

झुंझुनू में 15 से 31 का सफर आसान नहीं

 

अब बात झुंझुनू नगर परिषद की। यहां बहुमत का आंकड़ा 31 है। कांग्रेस के पास 30 पार्षद हैं, जबकि भाजपा के 15 और निर्दलीयों के भी 15 पार्षद हैं। भाजपा के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि 15 से 31 तक कैसे पहुंचा जाए।

राजनीतिक जोड़-तोड़ में 15 निर्दलीयों के अलावा कांग्रेस खेमे में सेंध की संभावनाओं की चर्चाएं भी हो रही हैं। लेकिन यह सफर इतना सीधा नहीं है। जनता भी सब देख रही है और राजनीतिक दल भी।

 

राज जीतेगा या नीति?

 

झुंझुनू के राजनीतिक गलियारों में बुधवार को सबसे ज्यादा चर्चा इसी बात की रही कि जनादेश और सत्ता के समीकरण में किसकी जीत होगी? खेतड़ी का उदाहरण सामने रखकर लोग कह रहे हैं कि राजनीति में असंभव कुछ नहीं। कल तक कांग्रेस के चुनाव चिन्ह पर जीतने वाली गीता सैनी आज भाजपा के साथ हैं और पालिकाध्यक्ष बनने की स्थिति में हैं। दूसरी ओर बगड़ में भाजपा से टिकट मांगने वाले राकेश शर्मा अब कांग्रेस के साथ पालिकाध्यक्ष की दौड़ में हैं।

यही घटनाक्रम झुंझुनू नगर परिषद को लेकर चल रही चर्चाओं को भी धार दे रहे हैं। दिनभर जिला मुख्यालय पर लोगों की जुबान पर एक ही सवाल रहा—बोर्ड किसका बनेगा? जवाब के लिए अभी जोड़-तोड़ का खेल बाकी है। कांग्रेस बहुमत से एक कदम दूर है और भाजपा बहुमत से काफी पीछे। निर्दलीय पार्षद दोनों खेमों के लिए महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में अंतिम तस्वीर राजनीतिक फैसलों, समर्थन और संभावित पाला बदलने के बाद ही साफ होगी।

लोकतंत्र में जनादेश सर्वोपरि माना जाता है, लेकिन निकाय राजनीति में बदलते समीकरणों ने एक बार फिर यह सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि राजनीति में राज बदलता है तो क्या नीति भी बदल जाती है? खेतड़ी और बगड़ के घटनाक्रम फिलहाल इसी बहस के दो अलग-अलग उदाहरण बनकर सामने आए हैं।

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