टूटी सडक़ों और अधूरे पुल निर्माण से बढ़ी परेशानी, जिम्मेदारों की लापरवाही का खामियाजा भुगत रहा आमजन

श्रीराम तिवाड़ी
नोखा (नवयत्न)। शहर में लंबे समय से चल रहे विकास कार्यों, टूटी सडक़ों, जगह-जगह बने गड्ढों और अधूरे पुल निर्माण के कारण आमजन की परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है। शहर के अलग-अलग हिस्सों में आवागमन की समस्या के चलते लोगों को रोजाना मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। खासकर रेल लाइन के दोनों तरफ शहर बसा होने के कारण एक हिस्से से दूसरे हिस्से में आने-जाने के लिए सीमित रास्ते होने से यातायात का दबाव बढ़ जाता है।
टूटी सडक़ें बनीं परेशानी का कारण
नोखा शहर के कई हिस्सों में सडक़ें क्षतिग्रस्त हैं। जगह-जगह बने गहरे गड्ढे वाहन चालकों के लिए खतरा बने हुए हैं। बारिश अथवा पानी भरने की स्थिति में इन गड्ढों का अंदाजा लगाना और भी मुश्किल हो जाता है। ऐसे में दुपहिया वाहन चालकों के साथ ऑटो, कार और अन्य वाहनों में सफर करने वाले लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि नहरी पानी की योजना के तहत सडक़ निर्माण या मरम्मत के नाम पर कई जगह सडक़ें खोदी गई, लेकिन काम पूरा होने के बाद उन्हें व्यवस्थित तरीके से दुरुस्त नहीं किया गया। नहरी पानी और सीवरेज के कार्यों के लिए खोदी गई सडक़ों के कारण भी आवागमन प्रभावित हो रहा है।
पुल निर्माण कार्य रुकने से हर व्यक्ति परेशान
नोखा में पुल निर्माण कार्य रुकने से भी शहरवासियों की परेशानी बढ़ गई है। रेल लाइन के दोनों तरफ शहर बसा होने के कारण शहरवासियों के लिए आवागमन के सुगम और सुरक्षित रास्ते बेहद महत्वपूर्ण हैं। पुल निर्माण कार्य रुकने के चलते लोगों को वैकल्पिक रास्तों का सहारा लेना पड़ रहा है, जिससे समय और दूरी दोनों बढ़ रहे हैं। एक ओर शहर की आबादी रेल लाइन के दोनों तरफ बसी हुई है, वहीं दूसरी ओर सीमित क्रॉसिंग और मार्गों के कारण रोजाना हजारों लोगों को आवागमन में परेशानी होती है। ऐसे में पुल निर्माण का कार्य रुकना आम आदमी की मुश्किलों को और बढ़ा रहा है।
जिला अस्पताल के पास रास्ता बंद, मरीजों को भी परेशानी
जिला अस्पताल के आसपास मार्ग बंद होने से मरीजों और उनके परिजनों की परेशानी भी बढ़ गई है। अस्पताल का मुख्य गेट तो हमेशा से बंद है और साइड के एक गेट से ही आवगमन होता है परन्तु इस गेट तक पहुंचने के पहले तीन रास्ते थे लेकिन पुल निर्माण के कारण मुख्य रास्ता हाइवे की तरफ वाला बंद करने से गेट के बाहर गाड़ी चालकों ने स्वेच्छा से पार्किंग बना ली और अमूमन यहाँ जाम रहता है जिससे एम्बुलेंस तक निकला कई बार मुश्किल हो जाता है। इलाज के लिए आने वाले मरीजों में कई बुजुर्ग, गंभीर रूप से बीमार और आपात स्थिति वाले मरीज शामिल होते हैं। रास्ता बंद होने के कारण उन्हें अस्पताल तक पहुंचने में अतिरिक्त परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मरीजों के साथ आने वाले परिजनों को भी वैकल्पिक रास्तों से होकर अस्पताल पहुंचना पड़ रहा है। आपात स्थिति में यह परेशानी और गंभीर हो सकती है। लोगों का कहना है कि अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थान के आसपास आवागमन की व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए, जिससे मरीजों और एम्बुलेंस को किसी प्रकार की बाधा का सामना न करना पड़े।
गड्ढे में ऑटो जाने से ऑटो चालक की कमर में आई चोट
शहर की खराब सडक़ों की स्थिति का खामियाजा आम लोगों को किस तरह भुगतना पड़ रहा है, इसका उदाहरण जगदीश शर्मा का मामला है। करीब दो माह पहले वे ऑटो चालक उगमपुरा के पास सडक़ पर बने गड्ढे में ऑटो जाने से उन्हें जोरदार झटका लगा। इसके बाद उनकी कमर में दर्द शुरू हो गया । चिकित्सकीय जांच के बाद डॉक्टर ने उन्हें स्लिप डिस्क की समस्या बताई। पीडि़त के अनुसार घटना के करीब दो माह बाद भी वे सामान्य रूप से चलने-फिरने में असमर्थ हैं और कमर के दर्द से परेशान हैं। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उपचार करवाना भी उनके लिए मुश्किल हो रहा है। इससे परिवार के सामने आर्थिक संकट की स्थिति भी पैदा हो गई है।
विकास कार्य जरूरी, लेकिन लोगों को राहत भी मिले
शहर में पानी, सीवरेज, पुल और अन्य विकास कार्य जरूरी हैं, लेकिन इन कार्यों के चलते आमजन को लंबे समय तक परेशानी न होए इसकी व्यवस्था भी जरूरी है। लोगों की मांग है कि निर्माण कार्यों के दौरान वैकल्पिक रास्तों को सुचारू रखा जाए तथा कार्य पूरा होने के बाद सडक़ों की तत्काल मरम्मत करवाई जाए। शहरवासियों का कहना है कि टूटी सडक़ें, गड्ढे, रुका हुआ पुल निर्माण और बंद रास्ते मिलकर नोखा की यातायात व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बन गए हैं। जिम्मेदार विभागों को समस्या का स्थायी समाधान करते हुए क्षतिग्रस्त सडक़ों की मरम्मत, पुल निर्माण कार्य को गति देने और अस्पताल सहित प्रमुख स्थानों पर सुचारू आवागमन की व्यवस्था सुनिश्चित करने की जरूरत है।

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