बिसाऊ की ऐतिहासिक मूक रामलीला में राम वनवास का मंचन, पुत्र वियोग में दशरथ ने त्यागे प्राण
विनोद प्रजापति
बिसाऊ (नवयत्न)। बिसाऊ की ऐतिहासिक मूक रामलीला में राम वनवास और पुत्र वियोग में राजा दशरथ के प्राण त्यागने के प्रसंग का मार्मिक मंचन किया गया। श्रीराम के वन गमन और राजा दशरथ के विलाप के दृश्यों ने दर्शकों को भावुक कर दिया। लीला में कैकेयी के दो वरदान मांगने के बाद श्रीराम को 14 वर्ष का वनवास मिलने का प्रसंग प्रस्तुत किया गया। पिता के वचन की मर्यादा निभाने के लिए श्रीराम ने वन जाने का निर्णय लिया। उनके साथ माता सीता और लक्ष्मण भी वन के लिए रवाना हुए। श्रीराम के अयोध्या से विदा होने के दृश्य ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। इसके बाद पुत्र वियोग में व्याकुल राजा दशरथ की पीड़ा और उनके प्राण त्यागने के प्रसंग का मंचन हुआ। कलाकारों ने भाव-भंगिमाओं के माध्यम से पिता-पुत्र के प्रेम और वचन पालन की मर्यादा को जीवंत किया। बिसाऊ की मूक रामलीला बिना संवादों के भाव-भंगिमाओं से प्रसंगों को प्रस्तुत करने की अपनी विशिष्ट परंपरा के लिए प्रसिद्ध है। कलाकारों ने अभिनय के माध्यम से त्याग, कर्तव्य और पारिवारिक प्रेम का संदेश दिया। इस दौरान रामलीला के संरक्षक जगदीश प्रसाद कसेरा और विजय मटोलिया ने मंच की शोभा बढ़ाई। मंच संचालन कपिलेश शर्मा ने किया।