22 लाख रुपए देकर बनवाया एफएमजी परीक्षा का फर्जी प्रमाण पत्र, एसओजी ने किया गिरफ्तार
निसं
जयपुर (नवयत्न)। विदेश से एमबीबीएस करने के बाद एफएमजी स्क्रीनिंग परीक्षा उत्तीर्ण किए बिना फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर राजस्थान मेडिकल काउंसिल आरएमसी में पंजीयन कराने और इंटर्नशिप करने के मामले में स्पेशल ऑपरेशन्स ग्रुप एसओजी ने एक और आरोपी राकेश कुमार यादव 32 को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि उसने 22 लाख रुपए देकर दिसंबर 2023 की एफएमजी परीक्षा का फर्जी प्रमाण पत्र बनवाया और दौसा के राजकीय मेडिकल कॉलेज में इंटर्नशिप शुरू कर दी थी। एसओजी के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक विशाल बंसल ने बताया कि इस संबंध में एसओजी थाने में 4 फरवरी 2026 को प्रकरण दर्ज किया गया था। विदेश से एमबीबीएस करने वाले अभ्यर्थियों के लिए भारत में पंजीयन से पहले निर्धारित एफएमजी स्क्रीनिंग परीक्षा उत्तीर्ण करना आवश्यक है।
तीन बार परीक्षा दी, लेकिन नहीं हुआ उत्तीर्ण
जांच के अनुसार कोटपूतली-बहरोड़ जिले के बानसूर निवासी राकेश कुमार यादव ने वर्ष 2011 में 12वीं पास करने के बाद जयपुर के कूकस स्थित नर्सिंग कॉलेज से चार वर्षीय जीएनएम पाठ्यक्रम किया। इसके बाद वर्ष 2017 में ताजिकिस्तान के अविसेना मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस में प्रवेश लिया और वर्ष 2022 में भारत लौट आया। जयपुर में तैयारी के दौरान उसने राष्ट्रीय परीक्षा बोर्ड, नई दिल्ली की ओर से आयोजित एफएमजी स्क्रीनिंग परीक्षा दिसंबर 2022, जून 2023 और दिसंबर 2023 में दीए लेकिन सफल नहीं हो सका। आरोप है कि इसके बाद उसने अलवर निवासी नफीस खान और दौसा निवासी शुभम गुर्जर के माध्यम से 22 लाख रुपए देकर दिसंबर 2023 की परीक्षा का फर्जी प्रमाण पत्र बनवाया।
दौसा मेडिकल कॉलेज में शुरू की इंटर्नशिप
एसओजी के अनुसार राकेश ने कथित फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर राजस्थान मेडिकल काउंसिल में आवेदन किया। पंडित नवल किशोर शर्मा राजकीय मेडिकल कॉलेज, दौसा में इंटर्नशिप आवंटित होने के बाद उसने इंटर्नशिप शुरू कर दी और आरएमसी जयपुर में अस्थायी पंजीयन के लिए आवेदन किया। फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर इंटर्नशिप करने से संबंधित खबरें प्रकाशित होने के बाद उसने इंटर्नशिप छोड़ दी थी। इस मामले में सह-आरोपी शुभम गुर्जर पहले ही गिरफ्तार हो चुका है, जबकि नफीस खान फरार है। पुलिस के अनुसार नफीस ने भी कथित तौर पर अपना फर्जी प्रमाण पत्र बनवाया था।
100 से अधिक कथित फर्जी अभ्यर्थी चिह्नित
मामले की जांच कर रहे एसओजी के पुलिस उपाधीक्षक जितेंद्र नावरिया की टीम अब तक 100 से अधिक कथित फर्जी अभ्यर्थियों को चिह्नित कर चुकी है। एसओजी के अनुसार, इस प्रकरण में राजस्थान मेडिकल काउंसिल के तत्कालीन रजिस्ट्रार सहित कुल 37 लोगों को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। एसओजी अधीक्षक सतनाम सिंह ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों में विदेश से एमबीबीएस करने वाले 32 अभ्यर्थी, आरएमसी के तत्कालीन रजिस्ट्रार डॉ. राजेश शर्मा, यूडीसी अखिलेश माथुर, एलडीसी फरहान हसन, मुख्य आरोपी भानाराम माली और एक दलाल शामिल हैं। जांच में सामने आया कि मुख्य आरोपी भानाराम माली और उसके साथी शुभम गुर्जर, इन्द्रराज गुर्जर सहित अन्य लोगों ने कथित तौर पर फर्जी प्रमाण पत्र बनवाने और आरएमसी में पंजीयन कराने के लिए प्रति अभ्यर्थी 20 से 30 लाख रुपए तक वसूले। एसओजी राकेश यादव से पूछताछ कर मामले में अन्य आरोपियों और कथित फर्जीवाड़े से जुड़े पहलुओं की जांच कर रही है।