सामूहिक स्वर में गूंज—महेश बसावतिया को सौंपी जाए विप्र कल्याण बोर्ड की कमान
जयशंकर जांगिड़
झुंझुनू (नवयत्न) । जिलेभर में विप्र समाज और पुजारी संगठनों की ओर से महेश बसावतिया को विप्र कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष पद पर नियुक्त करने की मांग तेज होती जा रही है। विभिन्न सामाजिक, धार्मिक एवं विप्र संस्थाओं ने एक स्वर में बसावतिया के नाम का समर्थन करते हुए राज्य सरकार से उन्हें इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपने की अपील की है।
पिछले दो दशकों से झुंझुनू जिले की सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभा रहे महेश बसावतिया आज विप्र समाज की पहली पसंद बनकर उभरे हैं। समाज के हर वर्ग में उनकी मजबूत पकड़ और स्वीकार्यता ने उन्हें इस पद के लिए सबसे प्रबल दावेदार बना दिया है।
संगठन और समाज के बीच मजबूत सेतु
महेश बसावतिया ने विप्र समाज और पुजारी सेवक महासंघ में विभिन्न जिम्मेदार पदों पर रहते हुए संगठन और समाज के बीच सशक्त सेतु का कार्य किया है। उन्होंने विप्र हितों के लिए लगातार संघर्ष करते हुए समाज में एकजुटता को मजबूती प्रदान की है।
राजनीतिक रणनीति में भी मजबूत पकड़
भारतीय जनता पार्टी के समर्पित कार्यकर्ता के रूप में बसावतिया ने संगठनात्मक कार्यों के साथ-साथ चुनावी रणनीति, मीडिया प्रबंधन और जनसंपर्क में भी अपनी अलग पहचान बनाई है। लगभग एक दशक तक जिला मीडिया प्रकोष्ठ अध्यक्ष रहते हुए उन्होंने लोकसभा और विधानसभा चुनावों में मीडिया संचालन की अहम जिम्मेदारी निभाई। उनकी रणनीतिक सोच का ही परिणाम रहा कि झुंझुनूं विधानसभा उपचुनाव में पार्टी को उल्लेखनीय सफलता मिली।
धार्मिक आयोजनों में अहम भूमिका
धार्मिक और सांस्कृतिक क्षेत्र में भी उनका योगदान उल्लेखनीय रहा है। उनके नेतृत्व में आयोजित श्री लक्ष्मी नारायण 108 कुंडीय महायज्ञ को जिले का भव्य आयोजन माना जाता है। इसके अलावा राम मंदिर उद्घाटन समारोह के अवसर पर देशभर के भामाशाहों को जोड़कर उन्होंने आयोजन को व्यापक स्तर पर सफल बनाया।
हर वर्ग में विश्वास और सम्मान
बसावतिया ने विप्र समाज और पुजारी संगठनों के माध्यम से समाजहित में कई रचनात्मक कार्य किए हैं, जिससे वे आज हर वर्ग में सम्मान और विश्वास के प्रतीक बन चुके हैं।
सरकार से निर्णायक कदम की अपेक्षा
जिले की विभिन्न सामाजिक, धार्मिक एवं विप्र संस्थाओं ने राज्य सरकार से मांग की है कि महेश बसावतिया को विप्र कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सौंपी जाए, ताकि उनके अनुभव और नेतृत्व का लाभ पूरे प्रदेश के विप्र समाज को मिल सके।