श्री जुझार जी राधा-कृष्ण मंदिर में जीर्णोद्धार एवं मूर्तियों की प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव आयोजित
निसं
कांवट (नवयत्न) । ग्राम भादवाड़ी स्थित प्राचीन *श्री जुझार जी राधा-कृष्ण मंदिर* जो गांव में श्रद्धा, वीरता और धर्म का जीवंतश प्रतीक है में मंदिर मूर्तियों की विधिवत पूजा अर्चना जीर्णोद्धार का तीन दिवसीय धार्मिक महोत्सव आयोजित हुआ। महिलाओं ने गांव में कलश यात्रा निकालने के बाद राधा कृष्ण, शिव परिवार, बजरंगबली हनुमान व संत श्री मोतीदास जी की मूर्तियों को नगर भ्रमण कर विधिवत पूजा अर्चना कर प्राण प्रतिष्ठा करवाई। यजमान पंडितो ने हवन यज्ञ कर विधिवत कार्य करवाया। मोके पर उपस्थित संत महात्माओं को दान दक्षिणा देकर भंडारा पंगत प्रसाद ली।
स्थानीय मान्यता है कि जुझार जी ने धर्म और गौ-रक्षा हेतु वीरगति प्राप्त की थी, तभी से ग्रामवासी इन्हें अपने आराध्य एवं रक्षक के रूप में पूजते हैं।
समय के साथ जीर्ण-शीर्ण हो चुके इस पावन मंदिर का यजमानों ने भव्य जीर्णोद्धार कर इसे नया स्वरूप प्रदान किया गया। मंदिर के शिखर, सभामंडप एवं गर्भगृह का नवनिर्माण कर सम्पूर्ण परिसर को आकर्षक बनाया गया है।
मंदिर के पुजारी श्रवण दास महाराज के सान्निध्य एवं यजमानों की उपस्थिति में विद्वान आचार्यों ने वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ *श्री जुझार जी महाराज एवं ठाकुर जी बाल-गोपाल राधा-कृष्ण जी* की दिव्य मूर्तियों की *प्राण-प्रतिष्ठा* संपन्न हुई। इस शुभ अवसर पर संत-महात्माओं द्वारा धार्मिक अनुष्ठान एवं प्रवचन आयोजित किए गए।
प्राण-प्रतिष्ठा के उपलक्ष्य में *रात्रिकालीन भजन संध्या* तथा *विशाल भंडारे* का आयोजन किया गया, जिसमें भादवाड़ी सहित आस-पास के सैकड़ों ग्रामवासियों ने श्रद्धापूर्वक भाग लेकर प्रसाद ग्रहण किया। पूरा वातावरण “जुझार जी महाराज की जय” एवं “जय श्री राधे गोपाल” के जयघोष से भक्तिमय हो गया। गांव में मंदिर जीर्णोद्धार एवं प्राण-प्रतिष्ठा के पश्चात यह मंदिर ग्राम की धार्मिक चेतना, एकता और सांस्कृतिक विरासत का प्रमुख केंद्र बन गया है।