ताजिया जुलूस को लेकर प्रशासन सतर्क, जुलूस के प्रति घटने लगा आमजन का रुझान

अबूबकर बल्खी
लाडनूं (नवयत्न) । आगामी शुक्रवार को शहर में निकलने वाले ताजिया जुलूस को लेकर पंचायत समिति सभागार में कम्युनिटी लायजन ग्रुप सदस्यों की बैठक आयोजित की गई। बैठक में एसडीएम ममता लहुआ, सीओ जितेंद्र सिंह और सीआई शिंभू दयाल मीणा ने ताजिया जुलूस के निर्धारित मार्ग, सुरक्षा व्यवस्था, यातायात और अन्य व्यवस्थाओं की जानकारी लेते हुए आपसी सौहार्द और शांति से जुलूस निकालने की अपील की। बैठक में प्रशासन ने स्पष्ट किया कि सभी धार्मिक कार्यक्रम सामाजिक समरसता और कानून व्यवस्था के दायरे में शांतिपूर्ण तरीके से मनाए जाएं और इसमें व्यवधान डालने वालों की सूचना पुलिस को दी जाए। इसके लिए सभी समुदाय के लोगों का सहयोग आवश्यक बताया।
ताजिया जुलूस के प्रति घटने लगा लोगों का रुझान :
लाडनूं क्षेत्र में पांच स्थानों से ताजिया निकालने की परंपरा लंबे समय तक रही है। असगर अली शेख ने बताया कि नागौरी सिलावट समाज द्वारा शेख टॉवर से एल्यूमिनियम का ताजिया, बड़ा बास चौक से कायमखानी समाज का ताजिया, हदीरा पोल से सांई समाज, तेली रोड़ के निवारिया बास एवं पटवा वाली गली सहित शहर में पांच ताजियों की परंपरा लंबे समय तक चलती रही है। हालांकि पिछले तीन वर्षों में इस परंपरा में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। अब पांच स्थानों में से तेली रोड़ के दोनों ताज़िए आपसी सहमति से बंद कर लाइसेंस प्रशासन को सुपुर्द कर दिए गए हैं। इसके बाद से महज तीन स्थानों से ही ताजिया का जुलूस निकाला जा रहा है। इस्लामिक विद्वानों के अनुसार ताजिया का जुलूस पूर्णतः इस्लामिक शिक्षा के विपरीत है। युवाओं में धार्मिक शिक्षा और अध्ययन के प्रति बढ़ती रुचि के कारण कुछ लोग अब सार्वजनिक जुलूसों में जाने की बजाय इन दिनों रोजा और इबादत को प्राथमिकता देने लगे हैं। मुहर्रम माह की नवीं और दसवीं तारीख के अवसर पर अब बड़ी संख्या में लोग दो दिनों का रोजा रखकर इबादत और आध्यात्मिक कार्य को अधिक महत्व दे रहे हैं।

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