शौक-मौज के कर्ज को चुकाने के लिए आईटी इंजीनियर ने खुद रची थी अपहरण की झूठी साजिश
निसं
जयपुर (नवयत्न)। भांकरोटा थाना पुलिस ने दोस्तों से लिए कर्ज और शौक-मौज के खर्च पूरे करने के लिए एक युवक ने खुद के अपहरण की झूठी साजिश रच डाली। इतना ही नहीं, उसने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से खुद के बंधक होने और अस्पताल में भर्ती होने की फर्जी तस्वीरें और वीडियो तैयार कर परिजनों को भेज दिए। इसके बाद फिरौती की मांग की।
भांकरोटा थाना पुलिस ने मामले का खुलासा करते हुए करीब 100 घंटे की मशक्कत के बाद युवक को उत्तराखंड के ऋषिकेश से सकुशल दस्तयाब कर लिया। पुलिस उपायुक्त पश्चिम प्रशांत किरण ने बताया कि परिवादी ने थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उसका साला, जो एक आईटी सॉफ्टवेयर कंपनी में विशेष परियोजना पर काम करता है, का अज्ञात लोगों ने अपहरण कर लिया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए डीसीपी के निर्देश पर एडीसीपी राजेश गुप्ता और एसीपी धर्मेंद्र कुमार शर्मा के सुपरविजन में भांकरोटा थानाधिकारी दीपक त्यागी के नेतृत्व में विशेष टीम गठित की गई।
पुलिस टीम ने तकनीकी सर्विलांस और उपलब्ध जानकारियों के आधार पर युवक की आवाजाही का रूट मैप तैयार किया। जयपुर से लेकर मथुरा, उज्जैन, दिल्ली, हल्द्वानी, नैनीताल, हरिद्वार और ऋषिकेश तक करीब 200 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज का विश्लेषण किया गया। लगातार प्रयासों के बाद पुलिस ने युवक को ऋषिकेश में लक्ष्मण झूला के पास से दस्तयाब कर लिया। बाद में उसे परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया।
पूछताछ और मोबाइल डेटा की जांच में सामने आया कि दीपक कुमार माली निवासी बाड़ी विजयनगर, ब्यावर और हाल निवासी पश्चिम विहार, भांकरोटा ने खुद के अपहरण का नाटक किया था। पुलिस के अनुसार युवक ने शौक-मौज के लिए दोस्तों से कर्ज ले रखा था। इसी कर्ज को चुकाने और परिजनों से पैसे ऐंठने के इरादे से उसने अपहरण की झूठी कहानी बनाई। उसने एआई उपकरणों की मदद से खुद के बंधक होने और अस्पताल में भर्ती होने की फर्जी तस्वीरें और वीडियो तैयार किए तथा परिजनों को भेजकर अपहरण का विश्वास दिलाने का प्रयास किया।