अबोध बालिका से दुष्कर्म व हत्या के प्रयास के आरोपी को आजीवन कठोर कारावास
संजय सोनी
झुंझुनू (नवयत्न)। झुंझुनूं पोक्सो न्यायालय के विशिष्ठ न्यायाधीश इसरार खोखर द्वारा दिये एक निर्णय में चार वर्ष आठ माह की अबोध बालिका से दुष्कर्म व उसकी हत्या के प्रयास के आरोपी राजेश उर्फ भोला पुत्र अमरचंद जाट निवासी पीपली पुलिस थाना पिलानी जिला झुंझुनूं को आजीवन कठोर कारावास की सजा व 50 हजार रूपये अर्थदण्ड से दण्डित किया है।
मामले के अनुसार पीडि़ता के पिता ने 14 अप्रैल 2026 को पुलिस में मामला दर्ज कराया कि उसकी नाबालिग अबोध बालिका प्रात: 11 बजे के आस-पास निकट की दुकान पर गयी थी तथा करीब आधे घंटे बाद तक वापस नहीं आयी तो घरवालों ने व गांव वालों ने मिलकर बालिका को अनेक स्थानों पर तलाश किया किन्तु वह नहीं मिली। तलाश के दौरान उनके गांव की एक महिला ने बताया कि राजेश उर्फ भोला एक बच्ची को लेकर दोबड़ा की तरफ जा रहा था जिस पर हम सब ने दोबड़ा गांव तक जाकर बच्ची की तलाश की लेकिन वह नही मिली।
बच्ची की तलाश करते हुये दोबड़ा की तरफ से वापस आ रहे थे तब दोबड़ा से पीपली रास्ते पर एक खण्डर स्कूल है, उसमें से चिल्लाने की आवाज आयी तब हम स्कूल की तरफ दौडक़र गये तो वहां पर उसकी बच्ची बिना कपड़ो के जमीन पर पड़ी थी तथा आरोपी राजेश उर्फ भोला पीडि़ता बच्ची के साथ उत्तेजित यौन हमला कर रहा था तो हमें देखकर राजेश उर्फ भोला भागने लगा तो वह वहीं गिर गया तो उसके पिछे भागकर उसे पकड़ लिया व पुलिस को फोन कर दिया। पुलिस वहां आयी व राजेश उर्फ भोला को पकड़ कर ले गयी। पुलिस थाना पिलानी ने मामला दर्ज कर बाद जांच राजेश उर्फ भोला के विरूद्ध पोक्सो सहित विभिन्न धाराओ में सम्बन्धित न्यायालय में चालान पेश किया।
पुलिस ने अपनी चार्जशीट में लिखा कि आरोपी राजेश घर के बाहर खेल रही पीडि़ता बच्ची को चॉकलेट के बहाने बहला-फुसलाकर गांव के बाहर खण्डरनुमा बंद स्कूल में ले गया व बालिका के साथ मारपीट कर दुष्कर्म किया तथा उसका गला दबाया। बालिका के परिजन व ग्रामीण ढूढते हुये जब खण्डर स्कूल में पहुंचे व बालिका को आरोपी से छुड़वाया। अगर मौके पर बालिका के परिजन व ग्रामीणजन नही पहुँचते तो आरोपी बालिका का गला दबाकर व दुष्कर्म के घिनौने कृत्य से बालिका को जान से मार देता।
इस प्रकार यह मामला गंभीर श्रेणी का व घृणात्मक अपराध है। राज्य सरकार की तरफ से पैरवी कर रहे विशिष्ठ लोक अभियोजक सुरेन्द्र सिंह भाम्बू द्वारा इस मामले में कुल 23 गवाहान के बयान करवाये तथा 45 दस्तावेज प्रदर्शित करवाते हुये न्यायालय में तर्क दिया कि आरोपी को सख्त से सख्त सजा दी जाये। विद्धान न्यायाधीश ने पत्रावली पर आई साक्ष्य का बारिकी से विश्लेषण करते हुये अपने निर्णय में लिखा कि दण्ड देते समय न्यायालय को आरोपी के प्रति अनावश्यक उदारता नही दिखानी चाहिये जो कि पूरे न्यायिक तंत्र को प्रभावित करती है तथा जन सामान्य की भावना को भी क्षीण करती है।
ऐसी स्थिति में न्यायालय का कत्र्तव्य है कि समुचित दण्डादेश से सामान्य स्थिति को देखकर आरोपी को दण्डित किया जाये। न्यायालय ने आरोपी को उक्त सजा व जुर्माने के साथ-साथ अन्य विभिन्न धाराओ में भी और सजा व जुर्माना से दण्डादिष्ट करते हुये आरोपी पर कुल एक लाख 50 हजार रूपये का अर्थदण्ड किया तथा न्यायालय ने आरोपी को सभी सजाये साथ-साथ भुगतने का भी आदेश दिया।